लचर सफाई व्यवस्था पर महापौर ने जताई कड़ी आपत्ति     

सतना :ननि के कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध गंभीर शिकायतें सामने आने पर उनके विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति को अनसुना कर दिए जाने के कारण महापौर और निगमायुक्त के बीच मतभेद स्पष्ट तौर पर सामने आए थे. जिसके चलते कलेक्टर से शिकायत करते हुए पार्षदों द्वारा निगमायुक्त को हटाने की मांग तक कर दी गई थी. वहीं अब वर्षा से पहले सफाई कार्य में गंभीर लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप व नगरवासियों का असंतोष सामने आने पर मामले ने एक बार फिर से तूल पकड़ लिया है.महापौर योगेश ताम्रकार द्वारा सोमवार को निगमायुक्त डॉ. शेर सिंह मीणा को पत्र लिखा गया.

पत्र में यह उल्लेख किया गया कि हाल ही में हुई वर्षा के दौरान शहर के अनेक क्षेत्रों में भारी जलभराव की स्थित निर्मित हुई. जिसके कारण आमजन को अत्यधिक असुविधा और संकट का सामना करना पड़ा. यह स्थिति न सिर्फ गंभीर और निंदनीय है बल्कि यह निगम प्रशासन की घोर लापरवाही एवं कार्य के प्रति उदासीनता का प्रत्यक्ष प्रमाण भी है. वर्षा से पहले शहर की सफाई व्यवस्था एवं जल निकासी व्यवस्था को सुदृण करने को लेकर 30 जून तक के लिए स्वास्थ्य शाखा में 60 कर्मचारियों को आऊटसोर्स के माध्यम से भर्ती करने से संबंधित फाइल 27 मार्च को निगम प्रशासन के पास भेजी गई थी.

लेकिन 2 महीने बीत जाने के बाद भी उक्त फाइल को न तो स्वीकृति दी गई और न ही कोई कार्रवाई की गई. यह कार्यशैली अत्यंत गंभीर प्रशासनिक विफलता है. यदि समय रहते उक्त फाइल को स्वीकृति प्रदान कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चत कर ली गई होती तो मौजूदा समय में शहर में उत्पन्न हो रही जल भराव की स्थिति को काफी हद तक टाला जा सकता था. शहर से जुड़े अतिसंवेदनशील विषय पर निगम प्रशासन की उदासीनता के कारण ननि की व्यवस्था पर प्रश्रचिंह लगा है. जिसे देखते हुए इस बात की मांग की गई है कि निगमायुक्त द्वारा सफाई संरक्षकों की भर्ती की फाइल को तत्काल स्वीकृति प्रदान की जाए और साथ ही शहर के सभी प्रभावित क्षेत्रों में जल निकासी एवं सफाई व्यवस्था तत्त्कल प्रभाव से सुदृण की जाए.
विरोध के पीछे चेंबर चुनाव
महापौर श्री ताम्रकार ने बताया कि बाजार क्षेत्र में सीवर लाइन के कार्य का टेंडर, वर्क आर्डर हो चुका है और काम चल रहा है. लेकिन यह सब कुछ जानते-समझते हुए भी व्यापारी हर तीसरे दिन शहर में किसी न किसी स्थान पर बैछकर कर धरना दे रहे हैं तो उसके पीछे उन्हें चेंबर चुनाव के पहले की सक्रियता के अतिरिक्त और कुछ समझ में नहीं आ रहा है. वे भी व्यापारी हैं, लिहाजा यदि निगमायुक्त के व्यवहार और ढीलेपन के चलते कोई असुविधा होती है तो वे स्वयं भी धरने पर बैठेंगे. लेकिन व्यापारी जो कर रहे हैं वे उसे उचित इसलिए नहीं मानते कि सीवर लाइन का कार्य जारी है. काम तो हो ही रहा है और होना ही है, लेकिन व्यापारियों का धरने पर बैठना कोई हल नहीं है.

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