इंदौर: संभागीय आरटीओ उड़नदस्ता द्वारा हाल ही में चलाए गए वाहन जांच अभियान में दो बसों के खिलाफ की गई कार्रवाई ने परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. जांच में एक बस बिना वैध परमिट के ललितपुर से इंदौर तक संचालित होती मिली, जबकि दूसरी बस मुंबई-इंदौर के अस्थायी परमिट पर नागपुर से इंदौर तक यात्रियों का परिवहन कर रही थी.
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी लंबी दूरी तक नियमों का उल्लंघन कर रही ये बसें आखिर विभागीय निगरानी से कैसे बचती रहीं यदि आरटीओ का नियमित निरीक्षण और निगरानी तंत्र प्रभावी है, तो ऐसी बसों का संचालन लंबे समय तक जारी रहना अपने आप में कई प्रश्न खड़े करता है. कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर रेडिसन चौराहा, तीन इमली चौराहा और नेमावर रोड पर 50 से अधिक बसों की जांच की गई. कार्रवाई के दौरान दोनों बसों पर 50-50 हजार रुपए का जुर्माना लगाकर कुल 1 लाख रुपए की वसूली की गई.
फिलहाल, यह कार्रवाई जहां विभाग की सक्रियता को दर्शाती है, वहीं यह भी संकेत देती है कि परिवहन व्यवस्था में निगरानी और प्रवर्तन तंत्र को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि सड़कों पर नियमों की अनदेखी कर रहे वाहन समय रहते पकड़े जा सकें.
आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई
आरटीओ अधिकारी प्रदीप शर्मा ने बताया कि अभियान के दौरान परमिट, फिटनेस, बीमा, फायर एक्सटिंग्विशर और फर्स्ट एड बॉक्स सहित अन्य सुरक्षा मानकों की जांच की गई. विभाग का कहना है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी.
