एनजीटी ने कठौंदा वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट को लेकर मांगी विस्तृत रिपोर्ट

जबलपुर: राष्ट्रीय हरित अधिकरण, एनजीटी के चेयरमैन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव व विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने कठौंदा वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट को लेकर नगर निगम जबलपुर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। एनजीटी ने प्लांट के संचालन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व पर्यावरणीय अनुपालन की मानीटरिंग की व्यवस्था दी है। नगर आयुक्त ने अपने जवाब में कहा है कि वे इस तथ्य का सत्यापन करेंगे कि क्या उत्तराखंड के रुद्रपुर से कोई अपशिष्ट कठौंदा वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट में उपचार हेतु भेजा गया था। नगर निगम द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में कई पहलें प्रगति पर होने के कारण एनजीटी ने निर्देश दिया कि इन कार्यों की अद्यतन स्थिति सहित विस्तृत प्रगति रिपोर्ट अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पूर्व प्रस्तुत की जाए। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है।

दरअसल, यह मामला कठौंदा क्षेत्र में कचरा जलने के बाद धूल और प्रदूषण के व्यापक प्रभाव की ओर ध्यान आकर्षित किए जाने वाले समाचारों पर संज्ञान के आधार पर सुनवाई में लिया गया है। सुनवाई के दौरान नगर निगम ने अवगत कराया कि कठौंदा स्थित वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट वर्ष 2016 से संचालित है। इसका संचालन जबलपुर एमएसडब्ल्यू प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। अक्टूबर 2025 से जनवरी 2026 तक प्लांट में व्यापक ओवरहालिंग कार्य किया गया था। जिसके बाद जनवरी 2026 में इसे पुन: संचालित कर दिया गया। प्लांट के बंद रहने की अवधि में एकत्रित लगभग 38,138 टन ठोस अपशिष्ट को पुन: चालू होने के बाद प्रसंस्कृत किया गया है।

नगर निगम के पास घर-घर कचरा संग्रहण के लिए 403 वाहन उपलब्ध हैं, जिनमें जैविक व अजैविक कचरे के पृथक संग्रहण की व्यवस्था है। कचरा पृथक्करण को बढ़ावा देने के लिए जनजागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। जैविक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन हेतु 100 टन प्रतिदिन क्षमता का बायो.सीएनजी प्लांट प्रस्तावित किया गया है। इसके अतिरिक्त, वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट में उच्च ऊष्मीय क्षमता वाले अपशिष्ट के पृथक्करण हेतु नई प्री-प्रोसेसिंग प्रणाली भी स्थापित की गई है। कठौंदा व रानीताल स्थित पुराने कचरा डंप स्थलों के संबंध में नगर निगम ने दावा किया कि दोनों स्थलों का बायो-रिमेडिएशन कार्य पूरा कर लिया गया है। कठौंदा स्थल से प्राप्त आरडीएफ का उपयोग वर्तमान में वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट में ईंधन के रूप में किया जा रहा है। स्थल के चारों ओर आवश्यक बफर जोन बनाए रखा गया है व पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से पौधारोपण और पार्क विकास की योजना पर कार्य किया जा रहा है।

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