नई दिल्ली 01 जून (वार्ता) भारत और ऑस्ट्रेलिया ने अपनी रणनीतिक रक्षा साझेदारी को मजबूती से आगे बढाते हुए समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग, परस्पर सैन्य संचालन क्षमता और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है। दोनों देशों ने हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने सोमवार को यहां दूसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा मंत्री संवाद की सह अध्यक्षता की।
श्री सिंह ने बैठक के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा , ” ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स के साथ मेरी एक बेहतरीन बैठक हुई। हमने मिलकर द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के पूरे दायरे की समीक्षा की और इसे और आगे बढ़ाने के तरीकों और साधनों पर चर्चा की। भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा साझेदारी आने वाले वर्षों में लगातार प्रगति करने के लिए पूरी तरह तैयार है।”
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि दोनों पक्षों ने पिछले वर्ष अक्टूबर पहले संवाद के बाद से द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के क्षेत्र में प्रगति की समीक्षा की। दोनों मंत्रियों ने संयुक्त समुद्री सुरक्षा सहयोग रूपरेखा को अंतिम रूप देने के प्रयासों का समर्थन किया और समुद्री गश्ती विमानों के बीच अधिक सहयोग के माध्यम से समुद्री क्षेत्रीय जागरूकता बढ़ाने पर सहमति जताई। साथ ही समुद्र के भीतर निगरानी के अवसरों का पता लगाने का भी निर्णय लिया गया। दोनों पक्षों ने भारतीय तटरक्षक बल और ऑस्ट्रेलिया की समुद्री सीमा कमान के बीच गहरे सहयोग का भी समर्थन किया। उन्होंने स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के अपने साझा दृष्टिकोण के अनुरूप नौवहन और हवाई मार्ग की स्वतंत्रता, निर्बाध व्यापार तथा समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र संधि सहित अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन के प्रति अपना समर्थन दोहराया।
मंत्रालय ने बताया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया, हिंद महासागर रिम एसोसिएशन के समुद्री सुरक्षा पर कार्य समूह के सह-अध्यक्ष के तौर पर, हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए इस महीने चेन्नई स्थित समुद्री बचाव समन्वय केंद्र में संयुक्त रूप से एक ‘खोज और बचाव’ तथा ‘टेबलटॉप अभ्यास’ आयोजित करने के लिए तैयार हैं। दोनों पक्षों ने 2020 के ‘पारस्परिक लॉजिस्टिक्स सहायता समझौते’ के आधार पर अभ्यासों और अभियानों के लिए प्रक्रियात्मक अंतर-संचालनीयता को बढ़ाने के लिए व्यवस्थाओं का पता लगाने का संकल्प लिया। उन्होंने परिचालन संबंधी समझ और तालमेल बनाने के लिए एक-दूसरे के क्षेत्रों से विमानों की तैनाती जारी रखने पर भी सहमति व्यक्त की।
मंत्रियों ने घोषणा की कि भारत और ऑस्ट्रेलिया रक्षा औद्योगिक सहयोग बढाने के अगले कदम के रूप में, ‘रक्षा सामग्री और रक्षा सेवाओं के प्रावधान’ से संबंधित एक समझौता ज्ञापन को भी अंतिम रूप देने पर काम करेंगे। उन्होंने रक्षा औद्योगिक सहयोग और संपर्क के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया, और इसे द्विपक्षीय रक्षा उद्योग संबंधों में हो रही वृद्धि का एक प्रतिबिंब माना । दोनों पक्ष ‘रक्षा उद्योग, अनुसंधान और सामग्री’ पर संयुक्त कार्य समूह के माध्यम से आदान-प्रदान के और अवसरों का पता लगाने र भी सहमत हुए।
दोनों देश ‘सेंसर प्रौद्योगिकियों’ जैसे नए तकनीकी क्षेत्रों में भविष्य के रक्षा विज्ञान और प्रौद्योगिकी अनुसंधान सहयोग का पता लगाने के लिए उत्सुक हैं। ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री ने भारत को 2026 के ‘ऑस्ट्रेलियाई रक्षा विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान शिखर सम्मेलन’ में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। दोनों पक्षों ने सैन्य सहयोग के नए क्षेत्रों में विस्तार पर संतोष व्यक्त किया।
प्रशिक्षण सहयोग के मामले में, दोनों नेताओं ने अपने अधिकारियों को 2028-2029 में ऑस्ट्रेलियाई रक्षा कॉलेज में एक भारतीय विज़िटिंग इंस्ट्रक्टर की तैनाती की व्यवस्था को अंतिम रूप देने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि पेशेवर सैन्य जुड़ाव, ज्ञान के आदान-प्रदान और रणनीतिक तालमेल को मज़बूत किया जा सके। उन्होंने हिन्द प्रशांत क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बढ़ते रणनीतिक तालमेल का स्वागत किया। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने भागीदारों के बीच आपसी तालमेल बढ़ाने के लिए समुद्री क्षेत्र की जागरूकता पर सहयोग बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। मंत्रियों ने ‘क्वाड इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम सर्विलांस कोलैबोरेशन’ पहल के लिए ज़ोरदार समर्थन व्यक्त किया, जिसे शुरू में हिंद महासागर क्षेत्र में लागू किया जाएगा, साथ ही विषय-वस्तु विशेषज्ञों के आदान-प्रदान और टेबलटॉप अभ्यासों के माध्यम से भी आगे बढ़ाया जाएगा।

