
विंध्य की डायरी डॉ रवि तिवारी। पिछले ढाई दशक से प्रदेश की सत्ता से बाहर कांग्रेस ने वापसी की जो रणनीति बनाई है उसका असर हमेशा की तरह विपक्ष में कम अंदरूनी राजनीति में ज्यादा दिखाई दे रहा है. कांग्रेस ने इस बार अपने कार्यक्रमों को लेकर कुछ गोपनीय प्रयास किए हैं. प्रशिक्षण वर्ग को आवासीय के साथ-साथ सिर्फ अधिकृत लोगो तक ही सीमित रखने का प्रयास किया गया है. वर्ग में सिर्फ कार्डधरियो को प्रवेश की अनुमति दी गई,जबकि परम्परा के मुताबिक कांग्रेस किसी भी कार्यक्रम में राजनीति के लंबरदारों को कोई रोक-टोक कम ही देखने को मिलता था.इस घटनाक्रम से सबसे ज्यादा बेचैन चुनाव के लड़िया नजर आ रहे हैं. उन्हें अभी से यह समझ आ रहा है कि इस बार पार्टी जिन्हें मौका देगी उसमें उनकी राय शायद ही शामिल होगी.अवसरवादी नेताओं के बर्ताव से हासिए पर आ चुकी कांग्रेस के प्रति राजनीति की नई पौध में आकर्षण दिखाई दे रहा है. विचारधाराओ के संकट से जूझ रहे दलो के पास अब अपनी पहचान के नाम पर कुछ नही बचा. काग्रेस ही ऐसा दल है जो अभी भी अपनी विरासत को बचाए हुए है,जिस प्रकार से प्रशिक्षण शिविर में अनुशासन और एकता का पाठ पढाया गया है अगर इसका पालन सुनिश्चित किया गया तभी पार्टी संगठनात्मक रूप से मजबूत होकर सत्ता के खिलाफ लड़ाई लड सकेगी । अभी पार्टी की कार्यशैली को लेकर कार्यकर्ताओं में भी उत्साह देखने को मिल रहा है असली परीक्षा चुनाव और टिकट निर्धारण के समय देखने को मिलेंगी । कितने नेता पार्टी के साथ निष्ठावान होकर खड़े रहते है फिलहाल यह भविष्य के गर्त में है ।
सत्ता और विपक्ष आमने-सामने
विकास के मामले में सतना कभी तेजी से आगे बढ़ रहा था लेकिन कुछ वर्षो से पीछे होता जा रहा है. सतना के विकास को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के नेता आमने-सामने आ गये. दोनो ही दलो के नेता विकास के मामले में जनप्रतिनिधियों से उनके कार्यकाल के दौरान किये गये कार्य और लाई गई योजनाओं का हिसाब मांग रहे है. हाल ही में सतना दौरे पर पहुंचे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने जन संवाद के दौरान सांसद गणेश सिंह पर सवाल उठाते हुए पूछा कि 25 सालो से भाजपा के सांसद है लेकिन सतना को क्या मिला? साथ ही विकास कार्यो का हिसाब मांगा. प्रदेश अध्यक्ष ने विकास के मामले में राज्य सरकार और सतना सांसद को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास किया. उधर पलटवार करते हुए सांसद गणेश सिंह ने कहा कि वर्ष 2003 के पहले और 18 महीने की सरकार का हिसाब बता दें. राज्य बीमार राज्य बन चुका था साथ ही सवाल उठाते हुए सांसद ने कहा 2003 के पहले कांग्रेस के जमाने में कोई भी एक विकास कार्य हमारे विंध्य में किये है तो बता नही पाएगे. सांसद ने नसीहत देते हुए कहा कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को प्रदेश के विकास के आकड़ो को साथ लेकर चलना चाहिए.
कांग्रेस का होगा अपना भवन
लंबे समय तक कांग्रेस प्रदेश में सत्ता में रही है और समूचा विंध्य कभी कांग्रेस का गढ़ था. दूसरे शब्दों में कहे तो यही से सरकार चला करती थी, लेकिन खुद का भवन नही था. जिसने भी कमान सम्भाली वह कांग्रेस को अपने घर या कार्यालय से चलाते रहे, कार्यकर्ताओं के लिये कोई स्थाई ठिकाना नही रहा और लम्बे समय बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भवन मिलेगा. जहा से कांग्रेस संगठन संचालित होगा. हाल ही में प्रदेश प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष ने विधि विधान से नवीन भवन का शिलान्यास किया है. जल्द ही बहुमंजिला भवन बनकर तैयार होगा. कार्यकर्ताओं एवं नेताओं के आपसी सहयोग से यह भवन मूर्तरूप लेगा. लम्बे समय से भवन की मांग उठती रही है कई ऐसे नेता थे जो किसी के घर में संचालित कार्यालय में जाने से संकोच करते थे. भवन बन जाने के बाद जहा संगठन को और मजबूती मिलेगी, वही कार्यकर्ता और नेता बैठ कर संवाद कर सकेंगे।
