भैरुंदा। खरीफ सीजन की तैयारियों के बीच जिले में डीजल संकट ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. कलेक्टर के निर्देश के बाद पेट्रोल पंपों पर केन और ड्रम में डीजल देने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. प्रशासन का यह निर्णय भले ही व्यवस्था को नियंत्रित और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से लिया गया हो, लेकिन इसका सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों पर पड़ रहा है, जो खेती के कार्यों के लिए पर्याप्त मात्रा में डीजल जुटाने में असमर्थ दिखाई दे रहे हैं.
खरीफ सीजन के मद्देनजर इस समय खेतों की जुताई, बुवाई और फसल अवशेष प्रबंधन जैसे कार्य जोरों पर हैं. मूंग की कटाई के बाद थ्रेसर और हार्वेस्टर जैसे कृषि यंत्रों के संचालन के लिए भारी मात्रा में डीज़ल की आवश्यकता होती है. लेकिन मौजूदा हालात में किसान अपनी जरूरत के अनुसार ईंधन नहीं जुटा पा रहे हैं. कई जगह किसान रात में भी पेट्रोल पंपों पर पहुंचकर लंबा इंतजार करने को मजबूर हैं.
इस मामले में पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि वे प्रशासन के आदेशों का पालन करने के लिए बाध्य हैं. यदि कोई किसान केन या ड्रम लेकर आता है, तो उसे डीजल देने से मना करना पड़ता है. इससे किसानों को बार-बार वाहन लेकर पंप तक जाना पड़ रहा है, जोकठिन और महंगा साबित हो रहा है.
इधर डीजल की बढ़ती कीमतों का असर भी खेती पर साफ दिखाई दे रहा है. ट्रैक्टर और अन्य कृषि यंत्रों के किराए में अचानक वृद्धि हुई है. जहां पहले जुताई का खर्च कम था, वहीं अब यह 1500 से 2000 रुपए प्रति घंटे तक पहुंच गया है. इससे छोटे और सीमांत किसानों पर आर्थिक दबाव और अधिक बढ़ गया है.
वहीं दूसरी ओर, जिले में संचालित कई पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों के लिए आवश्यक सुविधाओं का अभाव भी सामने आ रहा है. भीषण गर्मी के बावजूद कई स्थानों पर ठंडे पेयजल की व्यवस्था नहीं है, वाहनों में हवा भरने के साधन बंद पड़े हैं और शौचालयों पर ताले लटके हुए हैं. जबकि नियमों के अनुसार हर पेट्रोल पंप पर साफ पेयजल, उपयोगी शौचालय, फस्र्ट-एड बॉक्स, मुफ्त हवा-पानी, शिकायत पुस्तिका व मूल्य सूची का स्पष्ट प्रदर्शन अनिवार्य होता है.
सुरक्षा मानकों की बात करें तो अग्निशामक यंत्र, बालू की बाल्टियां, इमरजेंसी स्विच, ‘नो स्मोकिंगÓ संकेतक और उचित अर्थिंग जैसी व्यवस्थाएं भी अनिवार्य हैं, लेकिन कई पंपों पर इन नियमों का पालन अधूरा नजर आता है. वहीं पेट्रोल पंपों पर प्राइवेट वाहनों की पार्किंग के कारण ग्राहकों को काफी मशक्कत कर पंप तक पहुंचाना पड़ता है किंतु प्रशासन का कोई ध्यान नहीं इससे उपभोक्ताओं की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं.
अधिकारियों का कहना है कि कलेक्टर के निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है. डीजल आपूर्ति सामान्य होते ही किसानों को पर्याप्त मात्रा में ईंधन उपलब्ध कराया जाएगा. हालांकि किसानों का मानना है कि यदि जल्द ही समाधान नहीं निकाला गया, तो खरीफ सीजन की तैयारियों पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है.
