हवाना, 31 मई (वार्ता) क्यूबा और अर्जेंटीना के वैज्ञानिकों ने मिलकर फेफड़ों के कैंसर के इलाज के लिए ‘वैक्सीरा’ नाम का एक ऐसा टीका तैयार किया है, जो पश्चिमी देशों के महंगे इलाजों के मुकाबले कहीं ज्यादा प्रभावी और बेहद सस्ता है। यह एक विशेष कैंसर टीका है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को फेफड़ों के एडवांस नॉन-स्मॉल सेल कैंसर की कोशिकाओं की पहचान करना और उन पर हमला करना सिखाता है। इस उपचार की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह केवल कैंसर प्रभावित अणुओं को निशाना बनाती है और स्वस्थ कोशिकाओं को कोई नुकसान नहीं पहुंचाती, जिसके मरीज पर बहुत कम दुष्प्रभाव होते हैं।
लंबे समय तक चले चिकित्सकीय परीक्षणों में इस टीके के बेहद सकारात्मक परिणाम सामने आये हैं। इसके इस्तेमाल से मरीजों के जीवित रहने की औसत अवधि 34 महीनों से दोगुनी से भी अधिक बढ़कर 77 महीने दर्ज की गयी है। आर्थिक मोर्चे पर भी यह टीका कैंसर पीड़ितों के लिए एक बड़ी राहत बनकर उभरा है। पश्चिमी देशों में जहां फेफड़ों के कैंसर के इलाज का सालाना खर्च लगभग 2,00,000 डॉलर (करीब 1.6 करोड़ रुपये) आता है, वहीं क्यूबा की इस ‘वैक्सीरा’ दवा का सालाना खर्च मात्र 5,000 डॉलर (करीब चार लाख रुपये) है। पिछले 65 वर्षों से अमेरिका द्वारा लगाये गये कड़े आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद, इस टीके का विकास क्यूबा के जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है।

