शाजापुर: जिला अस्पताल में विभाग के वरिष्ठ संयुक्त संचालक द्वारा शुक्रवार को निरीक्षण किया गया. जिसमें कई सारी अव्यवस्थाएं सामने आई. कई बार तो संयुक्त संचालक अव्यवस्थाएं देख इतने नाराज हुए कि उन्हें अधिकारियों को फटकार भी लगाना पड़ी. कहीं एक्सयपायरी डेट के इंजेक्शन मिले तो कहीं अधूरी किट मिली. तो कहीं ड्यूटी से डॉक्टर नदारद मिले.
वरिष्ठ संयुक्त संचालक डॉ. निदारिया शुक्रवार को जिला अस्पताल निरीक्षण करने पहुंचे. जिन्होंने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए सिविल सर्जन और सीएमएचओ को तत्काल सुधार के कड़े निर्देश दिए. सुबह करीब 11 बजे शुरू हुआ निरीक्षण में व्यवस्थाओं की पोल खुलती चली गई. कभी इमरजेंसी किट अधूरी मिली, कभी डॉक्टर गायब मिले तो कहीं पीआईसीयू के बाहर बना मीटिंग हाल देखकर ही अधिकारी भडक़ गए.
ट्रामा सेंटर से की निरीक्षण की शुरूआत
जिला अस्पताल पहुंचे डॉ. निदारिया ने अपने निरीक्षण की शुरूआत ट्रामा सेंटर से की. इसके बाद वे इमरजेंसी वार्ड क्रमांक 29 में पहुंचकर उन्होंने डॉक्टर से इमरजेंसी किट मंगवाईए, लेकिन किट में जरूरी सामान अधूरा मिला. इस पर उन्होंने डॉक्टर रवि सोनी को जमकर फटकार लगाते हुए कहा कि जब तक निरीक्षण चल रहा है पूरी किट तत्काल यहां उपलब्ध होनी चाहिए. दवा वितरण केंद्र में भी कुछ खामियां मिलने पर सुधार के निर्देश दिए. फिर मरीजों की एंट्री के लिए बनाए गए अलग कक्ष को लेकर आपत्ति जताई. उन्होंने साफ कहा कि एक ही जगह रजिस्ट्रेशन होना चाहिए, बार बार मरीजों को भटकाना ठीक नहीं है. इमरजेंसी डॉक्टर के बैठने की व्यवस्था पर भी उन्होंने नाराजगी जताई, उनका कहना था कि डॉक्टर कक्ष नंबर 3 में बैठते हैं और मरीज इमरजेंसी वार्ड में परेशान होते रहते हैं. उन्होंने निर्देश दिए कि इमरजेंसी ड्यूटी डॉक्टर वार्ड नंबर-29 के पास ही बैठेंगे.
इमरजेंसी वार्ड में ही नहीं थे डॉक्टर, संयुक्त संचालक ले नाराजगी व्यक्त की जब डॉ. निदारिया ने दूसरी मंजिल पर वार्ड में भर्ती बच्चों की जानकारी ली. इसी दौरान बच्चों के डॉक्टर उमेश गौतम के निजी क्लीनिक के रजिस्ट्रेशन को लेकर सीएमएचओ ने हंसते हुए कहा कि रजिस्ट्रेशन नहीं है तो डॉ. निदारिया ने तुरंत पूछा श्फिर काम कैसे चल रहा है. अस्पताल के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यहां भर्ती कई बच्चों को पहले निजी क्लीनिक पर देखा जाता है और बाद में जिला अस्पताल में भर्ती किया जाता है. इसके बाद भर्ती मरीजों के वार्ड में पहुंचकर दवाइयों और गोलियों की व्यवस्था देखी गई. व्यवस्थाएं ठीक नहीं मिलने पर सुधार के निर्देश दिए गए. इसी बीच अधिकारी दोबारा इमरजेंसी वार्ड पहुंचे, जहां डॉक्टर अनुपस्थित मिले. यही नहीं जब संयुक्त संचालक ऑपरेशन थिएटर में पहुंचे और रोज होने वाले सीजर ऑपरेशन की जानकारी मांगी तो अस्पताल प्रशासन सही आंकड़े नहीं दे पाया, उन्होंने रात 12 बजे से सुबह तक होने वाले सीजर और रैफर मरीजों की पूरी रिपोर्ट मांगी है. साथ ही सिविल सर्जन से पूछा कि कौन कौन कर्मचारी कितने वर्षों से यहां पदस्थ हैं. इसकी पूरी लिस्ट लाकर मुझे दीजिएगा. इस पर भी सीएस स्पष्ट जवाब नहीं दे सके
