काबुल, 29 मई (वार्ता) अफगानिस्तान ने वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के साथ एक अरब डॉलर से अधिक का व्यापार किया जो इससे पिछले वर्ष की तुलना में 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
अफगानिस्तान के तालिबान शासन के उद्योग और वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025- 2026 में अफगानिस्तान ने भारत को 77 करोड़ डालर से अधिक मूल्य का निर्यात और वहां से 23 करोड़ डॉलर का आयात किया। वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार लगभग 89 करोड डॉलर का था। गौरतलब है कि ये आंकड़े दर्शाते हैं कि कई तरह के प्रतिबंधों और क्षेत्रीय चुनौतियों के बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है।
उद्योग और वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल सलाम जवाद अखुंदजादा ने कहा, ” अफगानिस्तान के भारत को किए जाने वाले मुख्य निर्यातों में अंजीर, हींग, किशमिश, केसर, पिस्ता, बादाम, सेब, जीरा और सूखी खुबानी शामिल हैं। भारत से आयात की जाने वाली सबसे महत्वपूर्ण वस्तुओं में औषधीय उत्पाद, नए कपड़े, सूती वस्त्र और उसने धान के चावल शामिल हैं।”
अफगानिस्तान वर्तमान में पाकिस्तान के रास्ते भारत के साथ सीधा व्यापार करने में असमर्थ है क्योंकि दोनों देशों के बीच प्रतिबंध अभी भी लागू हैं। ईरान का चाबहार बंदरगाह अफगानिस्तान के भारत के साथ व्यापार के लिए मुख्य वैकल्पिक मार्गों में से एक के रूप में कार्य करता है । इस बंदरगाह के चलते महीनों में परिचालन संबंधी चुनौतियों और देरी का सामना करना पड़ा है।
आर्थिक विश्लेषक अब्दुल जोहूर मोदाबेर ने कहा, “अफगानिस्तान को वैकल्पिक व्यापार गलियारों का विस्तार करने की दरकार है क्योंकि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच की चुनौतियों और साथ ही चाबहार बंदरगाह पर मौजूद समस्याओं ने व्यापार को और अधिक कठिन बना दिया है।” एक अन्य आर्थिक विश्लेषक अब्दुल बसीर तुर्की ने कहा, “अफगानिस्तान के भारत के साथ अच्छे राजनीतिक और राजनयिक संबंध हैं। ईरान और अमेरिका से जुड़े हालिया तनावों और टकरावों ने हालांकि चाबहार बंदरगाह पर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।”
उन्होंने कहा, “इसलिए इस्लामिक अमीरात को भारत के साथ आगे और चर्चा करनी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दोनों देशों के बीच व्यापार हवाई गलियारों के माध्यम से जारी रहे।”
गौरतलब है कि भारत विशेष रूप से कृषि उत्पादों, सूखे मेवों और औषधीय पौधों के लिए अफगानिस्तान के निर्यातों के लिए सबसे महत्वपूर्ण देशों में से एक बना हुआ है। अफगानिस्तान ने काबुल और इस्लामाबाद के बीच व्यापार में आई बाधाओं के बाद नयी दिल्ली के साथ अपने वाणिज्यिक संबंधों का विस्तार करने की मांग की है और निर्यात बढ़ाने के अलावा दवा क्षेत्र और अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों में भारतीय सहयोग को आकर्षित करने का प्रयास किया है।
