छतरपुर: जिले की कानून व्यवस्था और पुलिसिया संवेदनशीलता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। महाराजपुर थाना क्षेत्र में दबंगों के जानलेवा हमले का शिकार हुए एक पीड़ित परिवार को जब थाने से न्याय नहीं मिला, तो वे देर रात जिला मुख्यालय पहुंचे और एसपी कार्यालय के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गए। लगभग दो दर्जन से अधिक महिला, पुरुष और बच्चों ने न्याय की गुहार लगाते हुए सीधे एसपी को मौके पर बुलाने की मांग की।
पानी मांगने के बहाने घर में घुसने का प्रयास, फिर कुल्हाड़ी-डंडों से हमला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना की शुरुआत तब हुई जब गांव के पीछे जुआ और शराब का दौर चल रहा था। इसी बीच आरोपी रवि पाल नशे की हालत में पानी मांगने के बहाने गुड्डी पटेल के घर में जबरन घुसने लगा। विरोध करने पर गाली-गलौज शुरू हो गई। गुड्डी के बेटों ने जब बीच-बचाव किया, तो आरोपी ने अपने 10-15 साथियों को लाठी-डंडों और कुल्हाड़ी के साथ बुला लिया। इस बर्बर हमले में पटेल परिवार के गुड्डी पटेल (38), आशीष (16), सतीश (15), ग्यासी पटेल (39), जानकी प्रसाद (24), कैलाश और नीरज (25) सहित सात लोग लहूलुहान हो गए।
थाने से भगाया, सीढ़ियों पर मिली जान से मारने की धमकी
पीड़ितों का आरोप है कि जब वे घायल अवस्था में महाराजपुर थाने पहुंचे, तो पुलिस ने उनकी फरियाद सुनने के बजाय पहले से मौजूद आरोपी पक्ष की रिपोर्ट लिख ली। टीआई ने भी उनसे मिलने से साफ मना कर दिया और थाने से खदेड़ दिया। हद तो तब हो गई जब थाने की सीढ़ियों पर ही आरोपियों ने उन्हें दोबारा गांव आने पर जान से मारने की धमकी दी।
सीएसपी के आश्वासन पर माने प्रदर्शनकारी
थाने की इस बेरुखी से आहत होकर पीड़ित परिवार आधी रात को एसपी दफ्तर के बाहर धरने पर डट गया। हंगामा बढ़ते देख सिटी कोतवाली टीआई सतीश सिंह और बाद में सीएसपी अरुण कुमार सोनी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। सीएसपी अरुण सोनी द्वारा निष्पक्ष जांच, आरोपियों पर सख्त कार्रवाई और घायलों के त्वरित मेडिकल (MLC) कराने के ठोस आश्वासन के बाद रात करीब 10:10 बजे परिवार धरने से उठा। सीएसपी ने बताया कि घायलों को जिला अस्पताल भेजा गया है और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
