देवसर: ललितपुर-सिंगरौली रेलवे लाइन विकास और कनेक्टिविटी के लिहाज से जितनी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, स्थानीय जनता के लिए उतनी ही बड़ी मुसीबत साबित हो रही है।रेल लाइन निर्माण कार्य में लगे भारी वाहनों हाईवा की बेकाबू रफ्तार और निर्माण एजेंसी की लापरवाही के कारण क्षेत्र के ग्राम पूर्वा जागीर, खड़ौरा और कटौली के ग्रामीणों का दिन-रात जीना दुश्वार हो गया है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण स्थल और संपर्क मार्गों पर चौबीसों घंटे गिट्टी, मिट्टी और डस्ट से लदे भारी हाईवा वाहन निकलते हैं।
इन वाहनों के निकलने से हवा में धूल का ऐसा गुबार उठता है कि राहगीरों और आसपास के घरों में रहने वाले लोगों का सांस लेना भी मुश्किल हो गया है। नियमानुसार निर्माण एजेंसी को डस्ट दबाने के लिए नियमित रूप से पानी का छिड़काव करना चाहिए, लेकिन कंपनी द्वारा पानी का छिड़काव न के बराबर किया जा रहा है। वहीं ग्रामीणों ने बताया कि धूल के कारण न केवल दृश्यता कम हो रही है, जिससे सड़क हादसों का खतरा बना रहता है, बल्कि यह धूल लोगों के घरों के भीतर और खेतों में खड़ी फसलों पर भी जम रही है। लगातार धूल के संपर्क में रहने के कारण बुजुर्गों व बच्चों में सांस, खांसी व आंखों में जलन जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो रही हैं।
प्रशासनिक अनदेखी से रहवासियो में आक्रोश
ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार स्थानीय स्तर पर शिकायत की जा चुकी है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और कार्यदायी संस्था इस ओर ध्यान देने को तैयार नहीं हैं। दिन-रात उड़ती धूल ने लोगों की दिनचर्या को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है। क्षेत्र की जनता ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से भारी वाहनों की गति सीमा तय की जाए और प्रभावित गांवों पूर्वा जागीर, खड़ौरा, कटौली के मार्गों पर दिन में कम से कम तीन से चार बार पानी का अनिवार्य छिड़काव सुनिश्चित कराया जाए। यदि जल्द ही इस जन-समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
