जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट में मंगलवार को पदोन्नति में आरक्षण मामले की सुनवाई नियत थी, लेकिन चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ के अभाव में सुनवाई नहीं हो सकी। इसी के साथ सुनवाई 14 अगस्त तक के लिए बढ़ा दी गई। इस मामले में मध्य प्रदेश शासन की ओर से पूर्व एडिशनल सालिसिटर जनरल वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन पक्ष रखेंगे।
उल्लेखनीय है कि इस मामले की नौ जुलाई को हुई विगत सुनवाई में हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने अंडरटेकिंग दी थी कि अगली सुनवाई तक उक्त पॉलिसी के तहत किसी को प्रमोशन नहीं दिए जाएंगे। याचिकाकर्ता राजधानी भोपाल निवासी डॉ. स्वाति तिवारी व अन्य की ओर से अधिवक्ता सुयश मोहन गुरु ने पक्ष रखा था।
उन्होंने दलील दी थी कि वर्ष 2002 के नियमों को हाईकोर्ट के द्वारा आरबी राय के केस में समाप्त किया जा चुका है। इसके विरुद्ध मप्र शासन ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट में मामला अभी लंबित है, इसके बावजूद मप्र शासन ने महज नाममात्र का शाब्दिक परिवर्तन कर जस के तस नियम बना दिये, इसीलिए हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
