छतरपुर में अतिथि शिक्षकों का फूटा गुस्सा, एसडीएम के आश्वासन पर शांत हुए प्रदर्शनकारी; दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम

छतरपुर। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय की कथित सुस्ती और उदासीनता के कारण जिले में हजारों अतिथि शिक्षकों का भविष्य दांव पर लग गया है। आवेदन प्रक्रिया की अंतिम तिथि समाप्त होने में महज दो-तीन दिन का समय शेष रहने के बावजूद अब तक अनुभव सत्यापन (वेरिफिकेशन) का कार्य अटका हुआ है। इससे नाराज और भड़के अतिथि शिक्षकों ने सोमवार को जिला पंचायत सभाकक्ष के बाहर एकत्रित होकर शिक्षा विभाग की लापरवाही के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उग्र प्रदर्शन किया। जिस समय यह हंगामा हुआ, उस दौरान सभाकक्ष के भीतर समय-सीमा (TL) की महत्वपूर्ण प्रशासनिक बैठक चल रही थी।

एसडीएम ने दिया आश्वासन, तब शांत हुए शिक्षक

जिला पंचायत परिसर में हंगामा और नारेबाजी बढ़ती देख एसडीएम प्रशांत अग्रवाल तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारी शिक्षकों से सीधी चर्चा की और उनकी जायज मांगों को सुना। एसडीएम द्वारा उचित प्रशासनिक कार्रवाई का ठोस आश्वासन दिए जाने के बाद ही शिक्षक शांत हुए और प्रदर्शन समाप्त किया।

छुट्टियों के फेर में फंसा वेरिफिकेशन

मामले की गंभीरता और तकनीकी दिक्कतों को रेखांकित करते हुए अतिथि शिक्षक शिवा विश्वकर्मा ने बताया कि अनुभव सत्यापन की अंतिम तारीख 28 मई 2026 तय की गई है। इसके ठीक पहले शनिवार और रविवार को शासकीय अवकाश होने के कारण दफ्तर बंद रहे और अब अंतिम दिनों के बीच में भी छुट्टियां आ रही हैं। ऐसे में इतने कम समय में हजारों शिक्षकों का वेरिफिकेशन किया जाना नामुमकिन नजर आ रहा है।

बरसों की मेहनत पर पानी फिरने का खतरा

प्रदर्शनकारी शिक्षकों का साफ कहना है कि यदि समय रहते उनका सत्यापन कार्य पूरा नहीं हुआ, तो उनके बरसों के अनुभव के अंक पोर्टल पर दर्ज नहीं हो पाएंगे। इसके चलते वे आगामी शिक्षक चयन प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर हो जाएंगे। विभागीय लेत-देत और सुस्ती के कारण आज हजारों शिक्षित परिवारों की रोजी-रोटी और भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

24 घंटे का अल्टीमेटम, उग्र आंदोलन की चेतावनी

शिक्षकों ने आरोप लगाया कि वे कई दिनों से जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन बाबू और अधिकारी फाइलों को आगे नहीं बढ़ा रहे हैं। विभिन्न शिक्षक संगठनों ने जिला प्रशासन को दोटूक चेतावनी दी है कि यदि अगले 24 घंटों के भीतर लंबित अनुभव सत्यापन का कार्य युद्धस्तर पर पूरा नहीं कराया गया, तो पूरे जिले में चक्काजाम और उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा। पीड़ित शिक्षकों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सत्यापन की अंतिम तिथि को आगे बढ़ाया जाए।

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