सड़क निर्माण पर सवाल, ऊंची-नीची सड़कें और चौड़े गैप बन रहे हादसों की वजह

इंदौर: शहर में करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई सीमेंटेड सड़कें अब लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बनती जा रही हैं. शहर की कई प्रमुख सड़कों पर बने कंट्रोल जॉइंट्स (कटिंग गैप) इतने चौड़े और ऊंचे-नीचे हो चुके हैं कि दोपहिया वाहन चालकों के लिए रोज हादसों की वजह बन रहे हैं.बारिश, भारी ट्रैफिक और रखरखाव की कमी ने इन सड़कों की हालत और खराब कर दी है. बाइक और स्कूटी चालक चलते-चलते अचानक संतुलन खोकर गिर रहे हैं.

स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटे-बड़े हादसे अब आम हो चुके हैं, लेकिन नगर निगम की ओर से अब तक स्थायी समाधान नहीं किया गया है. शहर के कई हिस्सों में सड़क के बीच बने जॉइंट अब खतरनाक रूप ले चुके हैं. मरीमाता से अहिल्या आश्रम स्कूल मार्ग, गंजी कंपाउंड, भंडारी ब्रिज, परदेशीपुरा रोड, कालका मंदिर के सामने का मार्ग, पलासिया चौराहा से लैंटर्न चौराहा जाने वाली सड़क, पुलिस रेडियो से कलानी नगर जाने वाली वीआईपी रोड और इमली बाजार क्षेत्र जेएमबी के सामने राजमोहल्ला धार रोड महू नाका से आगे यहां तक की कई पुल तक में चौड़ी दरार जैसे इंदौर में कई सड़को में स्थिति खराब दिखाई दे रही है. सभी इलाकों में सड़क के बीच बने गैप चौड़े होने के साथ कई जगह सड़क का एक हिस्सा ऊपर और दूसरा नीचे हो चुका है. रात के समय और बारिश में यह खतरा और बढ़ जाता है.

देखरेख न होने पर बनती हैं दरारें
विशेषज्ञों के अनुसार कंक्रीट सड़कें मौसम के अनुसार फैलती और सिकुड़ती हैं. इसी दबाव को नियंत्रित करने के लिए सड़क पर तय दूरी पर कंट्रोल जॉइंट बनाए जाते हैं। लेकिन यदि इन्हें सही समय पर नहीं काटा जाए या बाद में उनकी देखरेख न हो, तो सड़क में अनियंत्रित दरारें बनने लगती हैं. इंदौर की कई सड़कों पर यही स्थिति दिखाई दे रही है. कई जगह जॉइंट्स के बीच डाला गया सीलेंट निकल चुका है, जिससे बारिश का पानी सड़क के नीचे तक पहुंच रहा है. इससे मिट्टी कमजोर हो रही है और सड़क धंसने लगी है.

वाहन चालक गिरते हैं स्लिप होकर
स्थानीय रहवासियों का कहना है कि तेज रफ्तार में बाइक का टायर इन गैप में फंस जाता है तो चालक सड़क पर गिर जाता है. इमली बाजार निवासी रोहित ठाकुर ने बताया कि सड़क के दोनों ओर आरसीसी सड़क है, जबकि बीच में पेवर्स ब्लॉक लगाए गए हैं. यह हिस्सा ऊंचा-नीचा हो चुका है, जिससे वाहन चालक स्लिप होकर गिर जाते हैं. वहीं पुलिस रेडियो से कलानी नगर जाने वाली वीआईपी रोड पर जूस विक्रेता दादाराम का कहना है कि सड़क के कट इतने चौड़े हो चुके हैं कि रोज वाहन चालक फिसलते दिखाई देते हैं.

जल्द ही जॉइंट्स भरने का कार्य करेंगे
इंदौर नगर निगम के अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर ने भी माना कि सड़क के बीच बने गैप दोपहिया वाहन चालकों के लिए खतरा बन चुके हैं. उन्होंने कहा कि ऐसी सड़कों को चिन्हित कर जल्द ही जॉइंट्स भरने और मरम्मत का कार्य कराया जाएगा, ताकि दुर्घटनाओं को रोका जा सके.

तत्काल मरम्मत और ग्राउटिंग जैसे कार्य करें
एसजीएसआईटीएस के सिविल इंजीनियरिंग एवं एप्लाइड मैकेनिक्स विभाग के सहायक प्राध्यापक इंजी. विवेक तिवारी के अनुसार सड़क और फुटपाथों में बने जॉइंट, डॉवेल बार और टाई बार सिस्टम कई जगह खराब हो चुके हैं. जॉइंट खुल चुके हैं, सीलेंट निकल गया है, कंक्रीट टूट रहा है, सड़क धंस रही है, किनारे टूट रहे हैं और पानी अंदर पहुंच रहा है. उन्होंने कहा कि यदि समय रहते मरम्मत नहीं की गई तो सड़क की मजबूती खत्म हो सकती है. डॉवेल बार सही स्थिति में नहीं होने से एक स्लैब से दूसरे स्लैब तक भार सही तरीके से ट्रांसफर नहीं हो पा रहा, जिससे सड़क ऊंची-नीची हो रही है और दोपहिया वाहन चालकों के लिए खतरा बढ़ रहा है. विशेषज्ञों ने जॉइंट सील बदलने, डॉवेल और टाई बार सुधारने, किनारों की मरम्मत और ग्राउटिंग जैसे कार्य तत्काल करने की सलाह दी है.

सही स्टेबलाइजेशन बेहद जरूरी
एसजीएसआईटीएस की रिटायर्ड प्रोफेसर वंदना तारे ने बताया कि सड़क के बीच अधिक गैप होने का बड़ा कारण ट्रांसफर जॉइंट और डॉवेल बार का सही तरीके से नहीं लगाया जाना है. उन्होंने कहा कि इंदौर की ब्लैक कॉटन सॉइल पर सड़क निर्माण के दौरान सही स्टेबलाइजेशन बेहद जरूरी होता है. यदि लेयर-बाय-लेयर मजबूत बेस तैयार न किया जाए तो सड़क जल्दी खराब होती है और जॉइंट खुलने लगते हैं. उनका कहना है कि जॉइंट जरूरी हैं, लेकिन जरूरत से ज्यादा जॉइंट दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं. साथ ही अच्छी मलिटी की फिलिंग और मजबूत ग्रेड के कंक्रीट का उपयोग बेहद जरूरी है, ताकि पानी और धूल सड़क के भीतर न जा सके.

गुणवत्ता और नियमित मेंटेनेंस बेहद जरूरी
भारतीय सड़क कांग्रेस (आईआरसी) और मोर्थ के मानकों के अनुसार कंक्रीट सड़क निर्माण में गुणवत्ता और नियमित मेंटेनेंस बेहद जरूरी है. लेकिन इंदौर में नई सड़कें कुछ ही समय में खराब होने लगी हैं, जिससे निर्माण गुणवत्ता और निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं.

खतरनाक जॉइंट्स की तकनीकी जांच हो
नागरिकों की मांग है कि सभी खतरनाक जॉइंट्स की तकनीकी जांच हो, जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए, खराब जॉइंट्स की तत्काल मरम्मत हो और दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.

सुरक्षा को गंभीर खतरा
शहरवासी अब यही सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर निगम किसी बड़े हादसे का इंतजार क्यों कर रहा है. जिन सड़कों पर लोग रोज जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे हैं, वहां चौड़े जॉइंट और ऊंची-नीची सड़कें अब सिर्फ तकनीकी खामी नहीं, बल्कि गंभीर सुरक्षा खतरा बन चुकी हैं.

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