भोपाल। आकाशवाणी के 90 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर राजधानी के रवींद्र भवन में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया, जहां बुंदेली लोकगीतों और सूफी गायन की शानदार प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरे कार्यक्रम के दौरान संगीत प्रेमी सुरों की इस महफिल में डूबे नजर आए।
कार्यक्रम का शुभारंभ लोक गायिका पुष्पलता शर्मा ने पारंपरिक बुंदेली विवाह गीतों से किया। बजा-बजा रमतुला और आ गए पार्वती के दूल्हा जैसे गीतों ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद उन्होंने गारी, लगुन, दादरा और स्वांग जैसे पारंपरिक लोकगीत प्रस्तुत कर बुंदेली संस्कृति की समृद्ध विरासत को मंच पर जीवंत कर दिया।
संगीत संध्या के दूसरे चरण में सूफी गायक उस्ताद मुनव्वर मासूम ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। उन्होंने हम्द बिस्मिल्लाह से शुरुआत करते हुए ख्वाजा जी महाराज करम सरकार, डूबती कश्ती को लगा दो पार’ पेश किया, जिसने पूरे सभागार को रूहानी रंग में रंग दिया। वहीं छाप तिलक सब छीनी और दमादम मस्त कलंदर की प्रस्तुति पर दर्शक झूम उठे।
आकाशवाणी भोपाल के प्रभारी समूह प्रमुख संजीव कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि आकाशवाणी ने पिछले नौ दशकों में समाचारों के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, लोक परंपराओं और संगीत को भी संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कार्यक्रम प्रमुख शुभम तिवारी ने कहा कि आकाशवाणी हमेशा आमजन का रेडियो रहा है और आगे भी अपनी इसी पहचान के साथ सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य करता रहेगा। उन्होंने कहा कि लोक और सूफी संगीत जैसे आयोजन भारतीय परंपराओं को जीवित रखने का माध्यम हैं।
कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ उद्घोषक पुरुषोत्तम श्रीवास और अमिता त्रिवेदी ने किया, जबकि अंत में कार्यक्रम अधिकारी योगेश नागर ने सभी अतिथियों और कलाकारों का आभार व्यक्त किया।
