समान नागरिक संहिता के पक्ष में उठी आवाज समान अधिकार और न्याय पर जोर

इंदौर: इंदौर मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता यूसीसी के अध्ययन और क्रियान्वयन को लेकर गठित उच्च स्तरीय समिति द्वारा शनिवार को इंदौर के जाल सभागृह में महत्वपूर्ण जनपरामर्श बैठक आयोजित की गई. बैठक का उद्देश्य यूसीसी के सामाजिक, कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों, वकीलों, धार्मिक प्रतिनिधियों और आम नागरिकों से सुझाव प्राप्त करना था.

कार्यक्रम में जहां बड़ी संख्या में लोगों ने ‘एक देश, एक कानून’ का समर्थन किया, वहीं मुस्लिम समाज के कुछ प्रतिनिधियों ने धार्मिक स्वतंत्रता और मुस्लिम पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप की आशंका जताते हुए विरोध दर्ज कराया.बैठक में समिति के सदस्य सेवानिवृत्त आईएएस शत्रुघ्न सिंह, कानूनविद् अनूप नायर, शिक्षाविद् गोपाल शर्मा और सामाजिक कार्यकर्ता बुधपाल सिंह उपस्थित रहे. इस दौरान इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा सहित कई प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे. समिति ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजन प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित यह समिति विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और पारिवारिक कानूनों से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर रही है. समिति प्रदेशभर में जनसंवाद बैठकों के माध्यम से लोगों की राय लेकर अपनी अनुशंसाएं राज्य सरकार को सौंपेगी. नागरिक 15 जून 2026 तक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भी अपने सुझाव भेज सकते हैं.

देश में कानून एक होना चाहिए
पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता ने कहा कि समान नागरिक संहिता लागू होना जरूरी है और सुप्रीम कोर्ट की मंशा भी यही रही है. जब देश में कानून एक है तो वह सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए. पूर्व विधायक गोपी कृष्ण नेमा ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 44 में समान नागरिक संहिता का स्पष्ट उल्लेख है. धर्म और कानून को अलग-अलग रखना जरूरी है. व्यक्ति धर्म पालन के लिए स्वतंत्र है, लेकिन देश में कानून एक होना चाहिए.

न्यायिक व्यवस्था सरल होगी
उद्योगपति एवं समाजसेवी अनिल भंडारी ने कहा कि देश की प्रगति और राष्ट्रीय एकता के लिए यूसीसी जरूरी है. उनके अनुसार समान कानून लागू होने से न्यायिक व्यवस्था सरल होगी और विवाद कम होंगे. बाल कल्याण समिति के चेयरमैन धर्मेन्द्र पांडे ने विवाह की न्यूनतम आयु तय करने और पूरे देश में समान शिक्षा व्यवस्था लागू करने की जरूरत बताई. अनूप शुक्ला ने कहा कि कई देशों में सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू हैं. आदिवासी समाज समिति के देवेन्द्र सोलंकी ने कहा कि यदि यूसीसी लागू होता है तो अनुसूचित जनजातियों की परंपराओं और जमीन से जुड़े अधिकारों पर असर पड़ सकता है. उन्होंने आदिवासी समाज के विशेष अधिकारों और परंपराओं को सुरक्षित रखने की मांग की.

इस्लाम में कानून के सम्मान की बात
मुस्लिम समाज की ओर से मोइनुद्दीन रजवी ने कहा कि सभी समुदायों को धार्मिक स्वतंत्रता प्राप्त है और यदि यूसीसी के जरिए मुस्लिम धार्मिक कानूनों में बदलाव की कोशिश हुई तो उसका विरोध किया जाएगा. मुस्लिम समाज के प्रतिनिधि हाज़ी सद्दाम पठान ने कहा कि यदि उच्च न्यायालय और सरकार इस दिशा में काम कर रहे हैं तो उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं है. इस्लाम भी देश के प्रति निष्ठा और कानून के सम्मान की बात करता है.

गुरु नानक देव ने समानता का संदेश दिया
सिख समाज के प्रतिनिधि राजेन्द्र सिंह कलसी ने कहा कि गुरु नानक देव जी ने सदियों पहले समानता और मानवता का संदेश दिया था. उन्होंने महिलाओं और पुरुषों को समान अधिकार और सम्मान देने की बात कहते हुए यूसीसी का समर्थन किया. खजराना मंदिर के पुजारी अशोक भट्ट ने कहा कि हर धर्म में महिलाओं को बराबर का हक मिलना चाहिए. धार्मिक परंपराएं अपने स्थान पर बनी रहें, लेकिन कानून सभी के लिए समान हों.

राष्ट्रीय एकता के लिए जरूरी
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि यूसीसी लागू होने को लेकर कोई संशय नहीं है, लेकिन इसे प्रभावी तरीके से लागू करना ज्यादा महत्वपूर्ण होगा. उन्होंने नियमों के उल्लंघन पर स्पष्ट दंड प्रावधान और धार्मिक संपत्तियों के संरक्षण के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाने की मांग की. विधायक मालिनी गौड़ ने कहा कि यदि देश में रहना है तो सभी के लिए समान कानून होना चाहिए. राष्ट्रीय एकता और समानता के लिए यूसीसी बहुत जरूरी है

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