जबलपुर:सार्वजनिक आतिशबाजी प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने और दुर्घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने विस्फोटक नियम 2008 के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों में कहा गया है कि सार्वजनिक आतिशबाजी के प्रदर्शन के लिए आयोजकों को लायसेंस के लिए आवेदन जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय को प्रदर्शन की निर्धारित तिथि से दो माह पूर्व प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। स्वीकृति मिलने पर प्रदर्शन तिथि से कम से कम एक माह पूर्व उन्हें अनुमति प्रदान की जायेगी।
निर्देशों में प्रदर्शन स्थल के चयन में सुरक्षा मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत स्थल और दर्शकों के मध्य न्यूनतम 100 मीटर की दूरी होनी चाहिए। जबकि, अस्पताल, विद्यालय और नर्सिंग होम से प्रदर्शन स्थल कम से कम 250 मीटर दूर होना चाहिए। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर दुर्घटना की स्थिति में लोगों को सुरक्षित निकालने में कठिनाई को देखते हुए ऐसे आयोजनों को खुले क्षेत्रों में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही प्रदर्शन स्थल के चारों ओर 100 मीटर की बैरिकेडिंग अनिवार्य की गई है, ताकि आम जनता का प्रदर्शन स्थल पर प्रवेश रोका जा सके।
प्रतिष्ठित संस्था से जोखिम आकलन कराना है अनिवार्य
इसके अतिरिक्त, आयोजकों को लाइसेंस आवेदन से पूर्व किसी प्रतिष्ठित संस्था से जोखिम आकलन कराना अनिवार्य किया गया है। ताकि, संभावित खतरों की पहचान हो सके और उसी के आधार पर जिला प्रशासन आपदा प्रबंधन योजना तैयार कर सके। प्रदर्शन में केवल मुख्य विस्फोटक नियंत्रक, नागपुर द्वारा अनुमोदित सामग्री का ही उपयोग किया जा सकेगा तथा किसी भी स्थिति में पोटेशियम क्लोरेट या अन्य प्रतिबंधित रसायनों वाली आतिशबाजी का प्रदर्शन वर्जित रहेगा।
प्रशासन द्वारा यह स्पष्ट किया गया है कि आतिशबाजी के संचालन के लिए अनुभवी एवं प्रशिक्षित कर्मियों की उपस्थिति अनिवार्य है। अनाधिकृत निर्माण और आतिशबाजी के अवैध प्रदर्शन के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्यवाही की जाएगी। जिले के सभी अनुविभागीय दण्डाधिकारी एवं पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे उत्सव सत्र के दौरान हर 15 दिन में आतिशबाजी प्रदर्शन की संयुक्त रिपोर्ट जिला मजिस्ट्रेट एवं पुलिस अधीक्षक के समक्ष प्रस्तुत करें, जिसमें आवेदनों की संख्या, जारी लाइसेंस और नियमों के अनुपालन का विवरण शामिल हो।
