जगदलपुर/रायपुर, 19 मई (वार्ता) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को यहां कहा कि देश के नक्सल मुक्त होने का ऐतिहासिक लक्ष्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, सुरक्षा बलों की बहादुरी और केंद्र तथा राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों से संभव हो पाया है।
श्री शाह ने छत्तीसगढ़ के बस्तर में आयोजित मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह बात कही है।बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा सदस्य राज्यों और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
उन्होंने कहा कि यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक बस्तर में आयोजित हो रही है और बैठक से पूर्व ही पूरा बस्तर नक्सल मुक्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में राज्यों की पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और खुफिया एजेंसियों ने सटीक समन्वय के साथ कार्य किया। उन्होंने कहा कि सभी सरकारी विभाग के तहत केंद्र और राज्य सरकारों ने नक्सल मुक्त क्षेत्रों में विकास पहुंचाने का कार्य किया है लेकिन संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि लगभग पांच दशकों तक विकास से वंचित रहे क्षेत्रों को देश के अन्य हिस्सों के समकक्ष लाना अब सरकार की प्राथमिकता है।
गृह मंत्री ने कहा कि मध्य क्षेत्र के राज्यों और केंद्र के बीच अधिकांश विवादित मुद्दों का समाधान हो चुका है और आज यह पूरा क्षेत्र न केवल नक्सल मुक्त बल्कि विवाद मुक्त भी हो चुका है। उन्होंने इसे संघीय ढांचे की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में क्षेत्रीय परिषद की बैठकों को निर्णायक, निरंतर और परिणामदायी बनाया गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2004 से 2014 के बीच जहां क्षेत्रीय परिषद की केवल 11 बैठकें हुई थीं, वहीं 2014 से 2026 के बीच इनकी संख्या बढ़कर 32 हो गई है। इसी अवधि में चर्चित मुद्दों की संख्या भी 569 से बढ़कर 1729 तक पहुंची, जिनमें लगभग 80 प्रतिशत मामलों का समाधान किया जा चुका है।
श्री शाह ने राज्यों से जल जीवन मिशन-2, स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और ग्रामीण विकास के क्षेत्रों में और अधिक गंभीरता से कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कुपोषण के खिलाफ संयुक्त अभियान चलाने, स्कूल ड्रॉपआउट दर कम करने तथा शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर जोर दिया।
गृह मंत्री ने कहा कि पोस्को और दुष्कर्म के मामलों में समय पर डीएनए जांच सुनिश्चित कर दोष सिद्धि दर को शत-प्रतिशत तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने उच्च न्यायालयों से पांच वर्ष से अधिक समय से लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष अदालतों के गठन का आग्रह भी किया।
उन्होंने चारों राज्यों से 1930 साइबर हेल्पलाइन के कॉल सेंटर को केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रारूप के अनुरूप अपडेट करने को कहा। साथ ही मिलावटखोरी के मामलों में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का व्यापक प्रचार-प्रसार करने की भी आवश्यकता बताई।
गृहमंत्री ने कहा कि नई आपराधिक न्याय संहिताओं के क्रियान्वयन में अच्छी प्रगति हुई है और अब लक्ष्य यह होना चाहिए कि वर्ष 2029 से पहले हर आपराधिक मुकदमे को तीन वर्षों के भीतर उच्चतम न्यायालय स्तर तक पहुंचाकर निष्पादित किया जाए।
