इंदौर: गर्मी बढ़ते ही शहर में आइसक्रीम, कुल्फी, आइस कैंडी और ठंडे पेय पदार्थों की मांग तेजी से बढ़ जाती है. बच्चे हों या बड़े, हर कोई गर्मी से राहत पाने के लिए आइसक्रीम खाना पसंद करता है. लेकिन बाजार में जिस चीज को लोग आइसक्रीम समझकर खा रहे हैं, वह वास्तव में कई मामलों में फ्रोजन डेज़र्ट होती है. दिखने और स्वाद में समान होने के कारण अधिकांश लोग दोनों के बीच का अंतर नहीं समझ पाते. खाद्य विभाग का कहना है कि यही भ्रम उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन रहा है.
खाद्य अधिकारी मनीष स्वामी ने बताया कि असली आइसक्रीम और फ्रोजन डेज़र्ट के बीच मूल अंतर उनके निर्माण में उपयोग होने वाली वसा का होता है. आइसक्रीम दूध और डेयरी फैट से तैयार की जाती है, जबकि फ्रोजन डेज़र्ट में दूध की वसा की जगह वनस्पति तेल, विशेष रूप से पाम ऑयल या वेजिटेबल फैट का उपयोग किया जाता है. यही कारण है कि फ्रोजन डेज़र्ट अपेक्षाकृत सस्ते होते हैं और बड़ी मात्रा में बाजार में उपलब्ध रहते हैं. उन्होंने बताया कि भारतीय खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार किसी भी उत्पाद को आइसक्रीम तभी कहा जा सकता है जब उसमें डेयरी फैट का इस्तेमाल हुआ हो. यदि उसमें वेजिटेबल ऑयल या वेजिटेबल फैट का उपयोग किया गया है तो उसे ‘फ्रोजन डेज़र्ट के रूप में ही बेचना अनिवार्य है. इसके बावजूद कई कंपनियां अपनी ब्रांडिंग और पैकेजिंग इस तरह करती हैं कि उपभोक्ता भ्रमित होकर उसे आइसक्रीम ही समझ लेते हैं.
पैकेट का लेबल ध्यान से पढ़ें
चित्रः मनीष स्वामी
मनीष स्वामी ने उपभोक्ताओं को सलाह देते हुए कहा कि जब भी कोई आइसक्रीम खरीदें तो पैकेट का लेबल ध्यान से पढ़ें. यदि सामग्री की सूची में ‘वेजीटेबल आइल’, ‘वेजीटेबल फेट’ या ‘पाम आइल’ लिखा हो तो समझ लें कि वह फ्रोजन डेज़र्ट है. पैकेट पर ‘फ्रोजन डेजर्ट’ लिखा होना भी इसकी पहचान है. उन्होंने कहा कि नियम के अनुसार फ्रोजन डेज़र्ट को आइसक्रीम बताकर बेचना अपराध की श्रेणी में आता है और इस पर कार्रवाई की जा सकती है.
अधिक सेवन नुकसानदायक
विशेषज्ञों के अनुसार फ्रोजन डेज़र्ट में अक्सर लिम्डि ग्लूकोज, सिंथेटिक फ्लेवर, शुगर सिरप, वेजिटेबल सोया प्रोटीन और कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल किया जाता है. यही वजह है कि यह लंबे समय तक टिके रहते हैं और देखने में ज्यादा आकर्षक लगते हैं. हालांकि स्वास्थ्य की दृष्टि से इनका अधिक सेवन नुकसानदायक हो सकता है. जानकारी के मुताबिक आइसक्रीम में प्रति 100 ग्राम लगभग 5.6 ग्राम फैट होता है, जबकि फ्रोजन डेज़र्ट में यह मात्रा 10 ग्राम से अधिक हो सकती है.
ठंडे उत्पाद सीमित मात्रा में करें सेवन
चित्र- डॉ. अमित लोधी
चिकित्सक डॉ अमित लोधी ने बताया कि फ्रोजन डेज़र्ट में उपयोग होने वाले पाम ऑयल और अन्य रसायन शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ा सकते हैं. जिन लोगों को पहले से कोलेस्ट्रॉल, हृदय रोग या मोटापे की समस्या है, उनके लिए ऐसे उत्पाद ज्यादा नुकसानदायक साबित हो सकते हैं. बच्चों में अधिक मात्रा में कृत्रिम रंग, शुगर सिरप और सेकरीन वाले उत्पाद खाने से भूख कम लगना, दांत खराब होना और पेट संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं. उन्होंने कहा कि पारंपरिक कुल्फी और शुद्ध दूध से बनी आइसक्रीम अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प मानी जा सकती हैं, क्योंकि इनमें डेयरी उत्पादों का उपयोग होता है और कृत्रिम तत्व कम होते हैं. हालांकि किसी भी मीठे और ठंडे उत्पाद का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए.
खाद्य विभाग चला रहा जांच अभियान
गर्मी के मौसम में मिलावट और घटिया गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों की बढ़ती शिकायतों को देखते हुए खाद्य विभाग लगातार जांच अभियान चला रहा है. खाद्य अधिकारी मनीष स्वामी ने बताया कि मार्च से 10 मई 2026 तक कुल 106 नमूने जांच के लिए लिए गए हैं. इनमें आइसक्रीम के 36, जूस के 4, पेप्सी और आइस कैंडी के 9, एनर्जी ड्रिंक के 53 और एडिबल आइस के 4 नमूने शामिल हैं. जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित दुकानदारों और निर्माताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
लगातार जारी रहेगा अभियान
खाद्य विभाग का कहना है कि लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा. विभाग विशेष रूप से ऐसे उत्पादों पर नजर रख रहा है जिनमें अधिक मात्रा में केमिकल, सिंथेटिक रंग या प्रतिबंधित तत्वों का उपयोग किया जा रहा है. अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे सस्ते और आकर्षक पैकेजिंग वाले उत्पाद खरीदने से पहले उनकी सामग्री अवश्य पढ़ें और किसी भी प्रकार की शिकायत मिलने पर खाद्य विभाग को जानकारी दें. गर्मी में राहत देने वाली आइसक्रीम और ठंडे उत्पाद स्वाद जरूर देते हैं, लेकिन जागरूकता के बिना यही स्वाद स्वास्थ्य के लिए खतरा भी बन सकता हैच इसलिए जरूरी है कि उपभोक्ता केवल विज्ञापन और पैकेजिंग देखकर नहीं, बल्कि लेबल पढ़कर समझदारी से खरीदारी करें
