नयी दिल्ली, 12 मई (वार्ता) सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का मजबूत प्रदर्शन वित्त वर्ष 2025-26 में भी जारी रहा और उन्होंने परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार के साथ रिकॉर्ड मुनाफा कमाया। वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि सार्वजनिक बैंकों ने इस साल 31 मार्च को समाप्त वित्त वर्ष में संयुक्त रूप से 3.21 लाख करोड़ रुपये का परिचालन लाभ कमाया। उनका शुद्ध लाभ 1.98 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया जो सालाना 11.1 प्रतिशत अधिक है। यह लगातार चौथा साल है जब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) ने संयुक्त रूप से शुद्ध लाभ अर्जित किया है। बीते वित्त वर्ष पीएसबी का कुल कारोबार 12.8 प्रतिशत बढ़कर 283.3 लाख करोड़ रुपये हो गया। उनके पास कुल जमा राशि 10.6 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि के साथ 156.3 लाख करोड़ रुपये और उनके द्वारा दी गयी कुल उधारी 15.7 प्रतिशत बढ़कर 127 लाख करोड़ रुपये हो गयी। मंत्रालय ने कहा है कि यह सार्वजनिक बैंकों में लोगों के विश्वास और अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर ऋण मांग को दिखाता है।
खुदरा, कृषि और एमएसएमई क्षेत्रों में ऋण वृद्धि व्यापक रूप से बनी रही। खुदरा, कृषि और एमएसएमई ऋणों में क्रमशः 18.1 प्रतिशत, 15.5 प्रतिशत और 18.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। आलोच्य वित्त वर्ष में गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) में उल्लेखनीय सुधार देखा गया। सभी पीएसबी का औसत सकल एनपीए 31 मार्च 2026 को घटकर 1.93 प्रतिशत और शुद्ध एनपीए 0.39 प्रतिशत रह गया। यह जोखिम में फंसे ऋण के ऐतिहासिक निचले स्तर को दर्शाता है। इसके अतिरिक्त, सभी सार्वजनिक बैंकों ने 90 प्रतिशत से अधिक का प्रावधान कवरेज अनुपात बनाये रखा। मंत्रालय के आंकड़ों में बताया गया है कि कुल वसूली 86,971 करोड़ रुपये रही, जो बेहतर वसूली तंत्र और पीएसबी में बेहतर ऋण अनुशासन को दर्शाता है।
लागत बनाम आय अनुपात सुधरकर 49.67 प्रतिशत हो गया। इससे पता चलता है कि बेहतर लागत प्रबंधन तथा प्रौद्योगिकी अपनाने और डिजिटल परिवर्तन पहलों से बैंकों को लाभ हो रहा है। वित्त मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि सार्वजनिक बैंकों के प्रदर्शन में निरंतर सुधार भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और बैंकिंग क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए सरकार द्वारा किये गये सतत सुधारों को दर्शाता है। इनमें बेहतर शासन व्यवस्था, प्रौद्योगिकी अपनाना, मजबूत ऋण अनुशासन और औपचारिक ऋण तक व्यापक पहुंच शामिल हैं। इन उपायों से तनावग्रस्त परिसंपत्तियों में कमी, परिचालन दक्षता में सुधार और पीएसबी की वित्तीय स्थिति अधिक मजबूत हुई है।

