मुंबई, 12 मई (वार्ता) भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (एएससीआई) ने विज्ञापनों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से तैयार कंटेंट के जिम्मेदार लेबलिंग के लिए दिशानिर्देशों का मसौदा जारी किया है। परिषद ने बताया कि ये दिशानिर्देश 10 फरवरी 2026 को संशोधित किये गये सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) संशोधन नियमों के अनुरूप हैं। सभी संबंधित हितधारक 13 जून तक इस प्रस्ताव पर अपने सुझाव दे सकेंगे। एएससीआई की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि अब ब्रांड अपने विज्ञापनों में एआई का अधिक उपयोग कर रहे हैं, जिसे देखते हुए प्रारूप दिशानिर्देश में जोखिम-आधारित दृष्टिकोण की वकालत की गयी है। इसमें तकनीक को नियंत्रित करने के बजाय उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले प्रभाव को प्राथमिकता दी गई है। प्रारूप के अनुसार, विज्ञापन में एआई का उपयोग तभी
भ्रामक या हानिकारक माना जायेगा जब उसमें ऐसे वादे किये गये हों जिन्हें पूरा नहीं किया जा सकता, कमजोर वर्गों का शोषण करे, असुरक्षित परिस्थितियां दिखाये या किसी वास्तविक व्यक्ति की छवि अथवा आवाज का बिना अनुमति उपयोग करे। एआई-जनरेटेड विज्ञापन सामग्री को तीन जोखिम श्रेणियों में विभाजित किया गया है – उच्च जोखिम (प्रतिबंधित सामग्री), मध्यम जोखिम (लेबल अनिवार्य) और कम जोखिम (लेबल अनिवार्य नहीं)। प्रतिबंधित सामग्रियों में ऐसे विज्ञापन आते हैं, जो अवैध हों, अधिकारों का उल्लंघन करें, भ्रामक दावे करें या एएससीआई कोड का उल्लंघन करें। एआई लेबल लगाने पर भी ये विज्ञापन नियमों का उल्लंघन माने जाएंगे। इनमें नकली समर्थन पत्र और उत्पाद के बारे में गलत जानकारी देना शामिल है। मध्यम श्रेणी में ऐसे विज्ञापनों को रखने का प्रस्ताव है जिनमें एआई का उपयोग उपभोक्ता के निर्णय को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करता हो और खुलासा न करने पर उपभोक्ता भ्रमित हो सकते हों। ऐसे मामलों में लेबल लगाना अनिवार्य होगा। कम जोखिम वाली श्रेणी में ऐसे विज्ञापनों को रखने का प्रस्ताव है जिनमें मामूली बदलाव किये गये हों या एआई का उपयोग उपभोक्ता की समझ या निर्णय को प्रभावित नहीं करता हो। ऐसे मामलों में लेबल आवश्यक नहीं होगा।

