
भोपाल। सागर जिले की बीना विधानसभा से कांग्रेस पार्टी से निर्वाचित विधायक निर्मला सप्रे ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को चुनौती देते हुए कहा है कि यदि वे बीना को जिला बनवा दें और विकास कार्यों के लिए 300 करोड़ रुपए दिला दें तो वह उनके साथ रहने को तैयार हैं।
सागर में मीडिया से चर्चा के दौरान विधायक सप्रे ने कहा कि उनकी विधानसभा सदस्यता का मामला न्यायालय में विचाराधीन है और जो भी निर्णय न्यायालय करेगा, वही उनका अंतिम रुख होगा। उन्होंने कहा कि जनता अपना निर्णय दे चुकी है और वह फिलहाल क्षेत्र के विकास कार्यों में जुटी हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रभारी मंत्री राजेन्द्र शुक्ल का आभार जताते हुए कहा कि बीते दो वर्षों में क्षेत्र में लगभग 300 करोड़ रुपए के विकास कार्य हुए हैं।
कांग्रेस कार्यालय नहीं जाने के सवाल पर सप्रे ने कहा कि उन्हें जहां से आमंत्रण मिलता है, वह वहां जाती हैं। उन्होंने कहा कि यदि उमंग सिंघार बीना को जिला बना दें और विकास कार्यों के लिए राशि उपलब्ध करा दें तो वह उनके साथ रहने को तैयार हैं।
सप्रे ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ नेता नहीं चाहते कि वह विधायक के रूप में कार्य करें। उन्होंने कहा कि यह कुछ लोगों की साजिश है, पार्टी की नहीं। उन्होंने दावा किया कि बीना क्षेत्र में लंबे समय से लंबित विकास कार्य उनके कार्यकाल में पूरे हो रहे हैं।
वही विधायक निर्मला सप्रे के बयान पर कांग्रेस नेता व पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सप्रे के बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि मामला राजनीतिक सौदेबाजी का है। शर्मा ने कहा कि यदि कोई विधायक यह कहे कि विकास कार्य और राशि मिलने पर वह किसी दल के साथ रहेगी, तो यह जनता के जनादेश का अपमान है।
उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से स्थिति स्पष्ट करने की मांग करते हुए कहा कि जब विधायक स्वयं कह रही हैं कि उन्हें कांग्रेस ‘ज्वाइन’ करनी पड़ेगी, तो इसका अर्थ है कि वह वर्तमान में कांग्रेस का हिस्सा नहीं हैं।
उल्लेखनीय है कि निर्मला सप्रे ने कांग्रेस के टिकट पर बीना विधानसभा सीट से चुनाव जीता था। बाद में लोकसभा चुनाव के दौरान वह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मंच पर भाजपा का गमछा पहने दिखाई दी थीं। इसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने के लिए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने याचिका दायर की थी, जो वर्तमान में विचाराधीन है।
