इंडोनेशिया में दो ज्वालामुखी में विस्फोट, तीन पर्वतारोहियों की मौत

जकार्ता/ 08 मई (वार्ता) इंडोनेशिया के सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक सुदूर हलमहेरा द्वीप पर स्थित माउंट दुकोनो में शुक्रवार सुबह अचानक हुए विस्फोट से तीन पर्वतारोही मौत हो गयी है।

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, यह हादसा तब हुआ, जब ज्वालामुखी से अचानक राख की मोटी परत और ज्वालामुखीय मलबा निकलने लगा। इससे क्रेटर के पास मौजूद पर्वतारोहियों का एक समूह फंस गया। अन्य जीवित बचे लोगों से मिली सूचना के बाद तड़के बचाव दल मौके पर पहुंचा।

जहां ट्रैकिंग समूह के कई सदस्य भारी राख के कारण लगी मामूली चोटों और सांस संबंधी समस्याओं के साथ सुरक्षित निकलने में सफल रहे, वहीं तीन लोगों की मौत ज्वालामुखीय चट्टानों की चपेट में आने से हुई। स्थानीय अधिकारियों ने पुष्टि की कि जब विस्फोट हुआ, तब ये पर्वतारोही शिखर के पास प्रतिबंधित क्षेत्र में थे।

माउंट दुकोनो के अलावा माउंट इबू में भी बड़ा विस्फोट हुआ है। उत्तरी मालुकु में स्थित इस ज्वालामुखी में स्थानीय समय के अनुसार आज दोपहर लगभग 1:41 बजे धमाका हुआ, जिससे राख का गुबार आसमान में कई मीटर ऊपर तक फैल गया। पिछले एक हफ्ते में यहां 27 विस्फोट दर्ज किये जा चुके हैं।

इसके अतिरिक्त, फिलीपींस का माउंट मेयोन और ग्वाटेमाला का फ्यूगो ज्वालामुखी भी अत्यधिक सक्रिय बने हुए हैं, जहां हाल के दिनों में लावा और राख निकलने के कारण अलर्ट जारी किया गया है। अलास्का के शिशाल्डिन और ग्रेट सिटकिन ज्वालामुखियों में भी लगातार हलचल और धीमी गति से लावा का रिसाव जारी है। इसके कारण विमानन सेवाओं के लिए ‘येलो’ और ‘ऑरेंज’ कोड लागू किये गये हैं।

माउंट दुकोनो पिछले कई महीनों से ‘हाई अलर्ट’ पर है और इंडोनेशियाई ज्वालामुखी विज्ञान एजेंसियों ने बार-बार पर्यटकों और स्थानीय लोगों को क्रेटर से कम से कम तीन किलोमीटर दूर रहने की चेतावनी दी है। बीबीसी का कहना है कि प्रशांत क्षेत्र के ‘रिंग ऑफ फायर’ पर स्थित इंडोनेशिया में अक्सर ज्वालामुखीय गतिविधियां होती रहती हैं, लेकिन सुरक्षा चेतावनियों को नजरअंदाज करने वाले साहसी पर्यटकों के लिए इस तरह के अचानक विस्फोट बड़ा खतरा बने हुए हैं।

इस त्रासदी के मद्देनजर इंडोनेशियाई अधिकारियों ने शिखर तक जाने वाले सभी ट्रैकिंग मार्गों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है और प्रतिबंधित क्षेत्र का दायरा बढ़ा दिया है। फिलहाल पूरा ध्यान ढलानों पर मौजूद किसी भी अन्य व्यक्ति को सुरक्षित निकालने और जीवित बचे लोगों को चिकित्सा सहायता प्रदान करने पर है। मृतकों की पहचान अभी तक आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं की गयी है।

 

 

 

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