
भोपाल। मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी व्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रदेश की खरीदी प्रणाली लगभग “ध्वस्त” हो चुकी है और यह किसान विरोधी होने के साथ प्रशासनिक विफलता का उदाहरण बन गई है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि खरीदी और स्लॉट बुकिंग की तिथियों को बार-बार बढ़ाया जाना खराब प्रबंधन और तंत्र की कमजोरियों को उजागर करता है।
पत्रकार वार्ता में वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं पी.सी. शर्मा, प्रवीण सक्सेना, अनोखी मानसिंह पटेल, अरुण श्रीवास्तव, अभिषेक शर्मा और जितेंद्र मिश्रा ने किसानों की व्यापक परेशानियों को सामने रखा। उन्होंने कहा कि खरीदी सीजन के पहले 14 दिनों में मात्र 9.5 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद होना सरकार की अपर्याप्त तैयारी और किसानों के प्रति संवेदनहीनता को दर्शाता है।
नेताओं के अनुसार, प्रदेश भर में किसान स्लॉट बुकिंग में दिक्कत, पंजीयन पर्ची अपलोड करने में तकनीकी खामियां, भुगतान में देरी और खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्था जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। साथ ही कई केंद्रों पर पेयजल, छाया, बैठने की व्यवस्था, शौचालय और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है, जिससे किसानों को कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है।
कांग्रेस का आरोप है कि खरीदी में देरी के कारण हजारों किसानों को मजबूरी में अपना गेहूं ₹1800 से ₹2200 प्रति क्विंटल की दर पर निजी व्यापारियों को बेचना पड़ा, जो न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹2625 से काफी कम है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
पार्टी ने मांग की है कि सरकार किसानों को मूल्य अंतर की राशि सीधे उनके खातों में जमा करे। साथ ही मूंग खरीदी, सोयाबीन के दाम और अन्य चुनावी वादों पर भी स्पष्ट जवाब दे।
कांग्रेस ने 7 मई को आगरा-मुंबई हाईवे पर प्रदेशव्यापी चक्का जाम आंदोलन का ऐलान किया है, जिसमें शाजापुर में बड़ा जुटान होगा। नेताओं ने चेतावनी दी कि किसानों को न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा।
