जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल व जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने आरक्षित वर्ग के प्रतिभावान प्राथमिक शिक्षकों को मैरिट के आधार पर लाभ प्रदान करने का राहत कारी निर्देश दिया है। इसके तहत स्कूल शिक्षा विभाग से पूर्व आदिवासी कल्याण विभाग अंतर्गत की गई सेवा अवधि को जोडऩे और शत-प्रतिशत वेतन देने कहा गया है। दरअसल यह मामला याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी प्रवीण कुमार कुर्मी सहित अन्य की ओर से दायर किया गया है। जिनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, अभिलाषा लोधी व काजल विश्वकर्मा ने पक्ष रखा।
उन्होंने दलील दी कि आयुक्त लोक शिक्षण ने हाईकोर्ट के पूर्व आदेश की मनमानी व्याख्या कर आरक्षित वर्ग के प्रतिभावान प्राथमिक शिक्षकों को आदिवासी कल्याण विभाग में दो वर्ष से अधिक की गई सेवा का लाभ न देते हुए स्कूल शिक्षा विभाग में नए सिरे से पदस्थाना की व्यवस्था दे दी थी। इससे याचिकाकर्ताओं को आर्थिक के साथ वरिष्ठता का नुकसान हो रहा था। इसीलिए न्यायहित में हाईकोर्ट की शरण ली गई। पसंद की शालाओं में पदस्थाना न देते हुए पूर्व में जनजातीय कार्य विभाग की शालाओं में जो उनके निवास से 400 से 900 किलोमीटर दूर थीं, पदस्थ कर दिया गया था। जबकि उनसे कम अंक पाने वाले अन्य वर्ग के अभ्यर्थियों को उनके गृह नगर में पदस्थ किया गया था। इसी भेदभाव को चुनौती दी गई थी। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने उक्त निर्देश दिये।
