मारुड/पांढुरना: मारुड संतरांचल का प्रमुख ग्राम है यहा 80% कृषी भुमी मे संतरे के बगीचे है जिसके कारण मारुड को जिले का कैलिफोर्निया भी कहा जाता है, इस वर्ष आंबिया बहार की फसल अच्छी थी लेकीन तापमान मे आचानक वृध्दी होने के कारण संतरा फल गलने लगे है इससे किसनो को भारी नुकसान हो रहा है ।उल्लेखनीय है की गत वर्ष आंबिया बहार को अच्छा भाव मिला था लेकीन उत्पादन कम था इस वर्ष फलन अच्छी होने के कारण काफी उम्मीद बंधी थी, लेकीन तेज धुप के कारण किसानो की उम्मीद पर पानी फिर गया है , दिन ब दिन तापमान मे वृध्दी होने के कारण भारी मात्रा मे बेर के आकार के संतरे डंठल से काले पडकर गीरने लगे है 50% से अधिक संतरे गीर गये है जिसके कारण संतरा उत्पादक किसानो मे भारी निराशा देखी जा रही है ।
संतरा उत्पादक किसानो से सौतेला व्यवहार
विडम्बना है की संतरा उत्पादक किसानो को न तो कृषी विभाग की ओर से कोइ मार्ग दर्शन मिल रहा है और न ही फलोद्दान विभाग की ओर से ,जिसके कारण किसान अपने अनुभव के आधार पर ही पारंपरिक रुप से संतरे की खेती कर रहे है । फलोद्दान विभाग द्वारा सिर्फ 15 वर्ष पुराने संतरा पेडो के जिर्णोद्दार के लिये अनुदान मे कुछ सामग्री प्रदान की जाती है इसके अलावा म प्र सरकार के पास संतरा उत्पादक किसानो के लिऐ कोई योजना नही है जबकी निकटस्थ प्रदेश महाराष्ट्र की सरकार किसानो को पौधे लगाने के लिऐ अनुदान से लेकर फसल बिमा तक दे रही है ।
किसानो को आर्थिक राहत की सक्त जरुरत है
संतरा उत्पादक किसानो कि स्थिति और जनप्रतिनिधियो द्वारा इस मुद्दे को उठाने की बात जटील विषय है मारुड सहीत पांढुरना जिले के संतरा उत्पादक किसान पिछलें कई वर्षो से लगातार फल गलन और संतरे को उचित दाम न मिलने जैसे संकटो से जुझ रहे है , सरकार की और से प्रोसेसिंग और नई तकनिककी पर ध्यान केंद्रित कर संतरा उत्पादक किसानो को आर्थिक राहत और संतरे को उचित मुल्य दिलाने की जरुरत एक बडा मुद्दा है ।
संतरा उत्पादक किसानों का कहना
मैने आंबिया बहार कि फसल पर 3 बार स्प्रे किया और नियमित सिंचाई कर रहा हु इसके बावजूद बेर के आकार के संतरे तेज धुप के कारण गीर रहे है इससे भारी नुकसान हो रहा है।
विनोद गावंडे
किसान एवं सामाजिक कार्यकर्ता मारुड।
1996 मे पूर्व मुख्य मंत्री और सांसद कमलनाथ ने संतरे के सुखे पेडो को सरकार से मुआजा दिलाने की पहल की थी इसके बाद आज तक किसी भी जनप्रतिनिधि ने संतरा उत्पादक किसानो के हित मे पहल नही की है ।
मुरलीधर बरडे किसान पैलेपार
