वॉशिंगटन, 29 अप्रैल (वार्ता) अमेरिका ने ईरान के कथित गुप्त वित्तीय ढांचे पर बड़ा प्रहार करते हुए 35 संस्थाओं और व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिका का आरोप है कि यह नेटवर्क अरबों डॉलर के अवैध लेनदेन के जरिए प्रतिबंधों से बचते हुए ईरान की आर्थिक और सामरिक गतिविधियों को सहारा दे रहे थे। अमेरिका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता थॉमस “टॉमी” पिगॉट के अनुसार यह कार्रवाई ईरान पर “अधिकतम दबाव” रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य तेहरान की उन वित्तीय व्यवस्थाओं को बाधित करना है जिनके माध्यम से वह अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को दरकिनार कर धन, तेल राजस्व और संवेदनशील सैन्य सामग्री तक पहुंच बनाता है।
अमेरिका का दावा है कि यह तथाकथित “शैडो बैंकिंग” नेटवर्क अवैध तेल बिक्री से प्राप्त धन को वैश्विक वित्तीय प्रणाली में स्थानांतरित करने, मिसाइल एवं हथियार कार्यक्रमों के लिए संसाधन जुटाने तथा क्षेत्रीय सहयोगी समूहों को समर्थन देने में उपयोग किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि इन वित्तीय चैनलों का संबंध इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) से जुड़े तत्वों तक जाता है, जिससे मौजूदा प्रतिबंधों के बावजूद उन्हें अंतरराष्ट्रीय आर्थिक गतिविधियों तक पहुंच मिलती रही। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) ने वैश्विक कारोबारियों, विशेषकर तेल, शिपिंग, बीमा और ऊर्जा क्षेत्रों से जुड़े संस्थानों को ईरान-संबद्ध कंपनियों के साथ लेनदेन को लेकर नयी चेतावनी भी जारी की है।
अधिकारियों ने विशेष रूप से चीन की तथाकथित “टीपॉट रिफाइनरियों” का उल्लेख किया, जिन पर ईरानी कच्चे तेल के प्रसंस्करण के जरिए प्रतिबंधों के उल्लंघन का आरोप है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि उसका अंतिम लक्ष्य केवल आर्थिक दंड नहीं, बल्कि ईरान के व्यवहार में बदलाव लाना है ताकि वह अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करे और क्षेत्रीय तनाव को बढ़ावा देने वाली गतिविधियां रोके।
अमेरिका के अनुसार प्रतिबंधित संस्थाओं में कई फ्रंट कंपनियां हॉन्ग कॉन्ग, ब्रिटेन और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे क्षेत्रों में संचालित हो रही थीं और जटिल स्वामित्व संरचनाओं के जरिए धनशोधन को अंजाम देती थीं। श्री पिगॉट ने कहा कि यह कदम ईरान को उसके “अस्थिरकारी गतिविधियों” के लिए जवाबदेह ठहराने की दिशा में उठाया गया है और भविष्य में भी ऐसे नेटवर्क पर कार्रवाई जारी रहेगी।

