ईरान ने सुरक्षा परिषद में अमेरिका पर समुद्री क्षेत्र को बंधक बनाने का आरोप लगाया

न्यूयॉर्क, 29 अप्रैल (वार्ता) ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका की कड़ी आलोचना करते हुए अमेरिका पर समुद्री डकैती को अंजाम देने और खास समुद्री क्षेत्र को बंधक बनाने का आरोप लगाया है।

संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावनी ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के अपने कदमों का बचाव करते हुए कहा कि अमेरिकी नीतियां अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन कर रही हैं।

जलमार्गों की सुरक्षा और संरक्षण पर सुरक्षा परिषद की एक खुली बहस में श्री इरावनी ने अमेरिकी नौसैनिक नीति के खिलाफ ईरान के कड़े रुख को स्पष्ट किया। उन्होंने हालिया अमेरिकी कार्रवाइयों को अंतरराष्ट्रीय कानून और क्षेत्रीय स्थिरता पर सीधा हमला बताते हुए घोषणा की कि अमेरिका समुद्री डकैतों और आतंकवादियों की तरह व्यवहार कर रहा है।

ईरानी राजदूत ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने 28 फरवरी से ईरान के खिलाफ एक गैरकानूनी समुद्री नाकाबंदी लागू कर दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरानी वाणिज्यिक जहाजों को जब्त किया और चालक दल के सदस्यों को हिरासत में लिया, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत ‘समुद्री डकैती’ है।

श्री इरावनी ने तर्क दिया कि अमेरिकी कार्रवाइयां न केवल संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन करती हैं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 3314 के तहत ‘आक्रामकता’ की श्रेणी में आती हैं। उन्होंने सुरक्षा परिषद के अन्य सदस्यों को भी उनके ‘पाखंड’ के लिए आड़े हाथों लिया और कहा कि अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए चिंता जताने वालों में से किसी में भी इस बैठक में अमेरिकी कृत्य की निंदा करने का साहस नहीं है।

राजदूत ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल शिपिंग मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के अपने आचरण का बचाव किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान के उपाय प्रथागत अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उसके अधिकारों और दायित्वों पर आधारित हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान समुद्री कानून पर 1982 के संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है, इसलिए वह इसके संधि प्रावधानों से पूरी तरह बाध्य नहीं है।

श्री इरावनी ने कहा कि ईरान ने फारस की खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी में हमेशा समुद्री सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता को बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि ईरान द्वारा उठाए गए कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और सुरक्षित मार्ग की आवश्यकता के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए उठाए गए हैं।

ईरानी राजदूत ने पश्चिमी देशों की भी तीखी आलोचना की और उन पर ‘दोहरे मापदंड’ अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि समुद्री स्वतंत्रता के प्रति उनकी चिंता वास्तविक नहीं है। राजदूत ने स्पष्ट किया कि समुद्री परिवहन में किसी भी व्यवधान की पूरी जिम्मेदारी हमलावर देश अमेरिका और उसके समर्थकों की है।

 

 

 

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