व्यावरा:बीते एक दशक में शासन ने 5 हजार करोड रूपए से अधिक की राशि बांधों के माध्यम से जलजीवन मिशन द्वारा गांवों में पेयजल आपूर्ति के लिए खर्च किए है. जिससे कि इन गांवों में निर्वाध जल आपूर्ति ग्रीष्मकाल में मिलती रही. जिले को सूखाग्रस्त और जलअभाव वाले जिले के रूप में मिली बदनामी से बाहर निकालने के लिए बृहद स्तर पर परियोजनाओं को स्थापित किया गया. लेकिन मैदानी हकीकत कुछ और ही सामने आ रही है. अवार्ड बंट गए, आंकलन भी हो गए मगर जलसंकट जस का तस है.
बड़े गांवों में यदि परिक्रमा की जाए तो सरकार का ‘मिशन’ लोगों को गर्मियों में’ जल’ नहीं दे पा रहा है और लोग भगवान भरोसे ‘जीवन’ यापन करने को मजबूर है. नवभारत टीम ने ऐसे ही बड़े गांवों जो परियोजनाओं से सीधे तौर पर लाभांवित होने की सूची में वहां स्पॉट कवरेज किया, मैदानी हकीकत जानी और जी सामने आया वह चौंकाने वाला निकला है. पेयजल संकट और मोल का पानी खरीदने के मामले में कुख्यात हो चुके पड़ाना के अलावा गिंदौरहाट और पहाड़गढ़ जैसे ईलाकों में हालात खराब हो रहे है. प्रचण्ड गर्मी अप्रैल से शुरू हो चुकी है और बारिश में अभी पूरे दो से ज्यादा का समय बचा है. पानी दिनों दिन गायब हो रहा है लोग महीने अपनी प्यास बुझाने के लिए जीजीविषा में जुट चुके है.
कल से ठप्प हो जाएगी पहाड़गढ़ परियोजना के 77 गांवों की पेयजल सप्लाई
ब्यावरा,सुठालिया क्षेत्र की पहाड़गढ़ परियोजना के तहत आने वाले 77 गायों में पेयजल सप्लाई के लिए जो पानी बचा है वह बमुश्किल 2 दिन का और है. परियोजना प्रबंधन के अनुसार जिस जगह पारसाना पार्वती नदी से पेयजल सप्लाई की जाती है वहां वर्तमान में जो पानी शेष बचा है उससे बमुश्किल तीन दिन और सलाई हो संभव हो सकेगी इसके बाद मजबूरन पेयजल सप्लाई बंद करना पड़ेगी वहां पर पूर्व से बना स्टॉप डेम ही है और उसका भी लीकेज होना बताया जाता है, जिसके कारण वहां पर्याप्त पानी कहर नहीं पाता है जबकि यहां पर एक उपयुक्त स्टॉप डेम बनना था ताकि गर्मी के दिनों में भी पर्याप्त पानी रह सके पानी के अभाव में आखिरकार 77 गांवों की नलजल योजना को बंद करना मजबूरी बन जाएगा करोड़ों खर्च फिर भी टैंकरों के भरोसे
पड़ाना आवास कॉलोनी में भीषण गर्मी के बीच 200
पक्षाला है भीषण गर्मी के बीच पड़ाना आवास
परिवार 5 दिन से बूंद-बूंद को तरस रहे कॉलोनी के करीब 200 लोगों पर दोहरी मार पड़ रही है एक तरक तापमान 43 डिनों के पार पहुंव गया है, दूसरी तरफ पीने के पानी का एकमात्र सहाना भी छिन गया है पंचायत स्तर पर बनी एकमात्र यानी की टंकी की मोटर में तकनीकी खराबी के चलते पिछले 5 दिनों से साप्लाई पूरी तरह ठप है मुसीबत यही खत्म नहीं हुई कॉलोनी को पानी देने वाली कुंडलिया डेम नाली योजना को मुख्य पाइपलाइन भी क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण समस्या और गंभीर बन गई है इससे पूरा क्षेत्र सरकारी जाल खोत से पूरी तरह कट गया है. कॉलोनी को निवासी ग्रहणियों ने बताया कि इधर-उधर से सुबह जल्दी उठकर से पानी लाना पड़ता है टैंकर भी नहीं आ रहे बुजुर्ग और बच्चे डिहाइड्रेशन की पेट में आ रहे है
1- गिंदौरहाट
जलमिशन के नल ग्रामीणों को चिढ़ा रहे
समीपस्थ ग्राम गिंदौखाट को आबादी करीब 3 हजार से अधिक है. यहां जलजीवन मिशन के द्वारा 500 के लगभग कनेक्शन वरों में किए गए है लेकिन पिछले 2 सातों में इन नलों में बराबर पेयजल सप्लाई नहीं हो पाई है. आम तौर पर ये नल चरों के बाहर शोपीस बनकर रह गए है पाईप लाईन पूरे गांव में बिछा दी गई है लेकिन इसमें पानी की सप्लाई नहीं होती ग्रामीण गांव की निजी और सर्वजनिक ट्यूबवेलों से पानी की जरूरत पूरी करते है. गांव में धानी की टंकी है लेकिन वह ट्यूबवेल से भरना पड़ती है. कुल मिलाकर पूरा गांव करोड़ों खर्च होने के कद भी पानी के लिए तरस रहा है और परंपरागत तरीकों से अपनी आवश्यकता पूरी कर रहा है. गांय के हनुमान मंदिर पर सुबह से ग्रामीणों, महिलाओं और युवाओं की भीड़ पानी भरने के लिए देखी जा सकती है. गांव की महिला गोकुल बाई के अनुसार वे अपने सार्ने काम छोड़कर सबसे पहले पानी भरनें के लिए मंदिर पहुंचती है यहां ट्यूबवेल से कुंए और पानी की छोटी टंकी में सप्लाई दी जाती है गांव को पार्वती परियोजना से पानी दिया जाना था लेकिन योजना विफल साबित हो रही है
