जबलपुर: रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर से सेवानिवृत्त कर्मचारियों द्वारा पेंशन भुगतान को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। विश्वविद्यालय के रिटायर्ड कर्मचारियों ने उच्च न्यायालय, जबलपुर में दायर याचिका में पारित आदेश के पालन की मांग की है। उच्च न्यायालय ने 18 अप्रैल 2026 को दिए गए आदेश में स्पष्ट रूप से निर्देशित किया है कि याचिकाकर्ताओं को मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1976 के नियम 64 के अनुसार अंतरिम पेंशन का भुगतान किया जाए।
दो वर्षों से पेंशन से वंचित कर्मचारी
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय के कई सेवानिवृत्त कर्मचारी विगत लगभग दो वर्षों से पेंशन लाभ से वंचित हैं। इससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों का कहना है कि सेवा अवधि पूरी करने के बाद भी उन्हें उनका वैधानिक अधिकार नहीं मिल पा रहा है।
प्रशासन से शीघ्र पालन की मांग
याचिकाकर्ताओं ने विश्वविद्यालय के कुलगुरू एवं कुलसचिव को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि उच्च न्यायालय के आदेश का तत्काल पालन करते हुए सभी संबंधित सेवानिवृत्त कर्मचारियों को शीघ्र पेंशन प्रदान की जाए। ज्ञापन में कहा गया है कि न्यायालय के स्पष्ट निर्देश के बावजूद पेंशन भुगतान में विलंब न्याय की भावना के विपरीत है।
याचिकाकर्ताओं की सूची
इस प्रकरण में जिन सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने याचिका दायर की है, उनमें एम.एल. रैकवार, जी.पी. कोरी, मुकेश चंद, सविता मिश्रा, आर.डी. पटेल, दुर्गा पदमांगे, अजय कुमार झारिया, कलावती दुबे, केशव प्रसाद, ओमप्रकाश डुमार, के.के. कोष्टा, सुनील मिश्रा, आर.पी. कोरी, सुदामा प्रसाद यादव, रामफल शर्मा तथा वशिष्ट प्रसाद गौड़ सहित अन्य कर्मचारी प्रमुख रूप से शामिल हैं।
