नागपुर, 28 अप्रैल (वार्ता) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को सत्ता में बैठे लोगों की प्रतिबद्धता और पूरे देश के लोगों के समर्थन का प्रमाण बताया है और कहा है कि भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि यह पहले से ही एक हिंदू राष्ट्र है।
श्री भागवत ने सोमवार को रेशिमबाग में डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति द्वारा आयोजित एक सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए इस परियोजना को सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया, जिसे दैवीय इच्छा का मार्गदर्शन मिला। इस अवसर पर मंदिर निर्माण से जुड़े लोगों को सम्मानित किया गया।
उन्होंने भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की घटना से तुलना करते हुए कहा कि ऐसे महान कार्य तभी संभव होते हैं, जब लोग अपना योगदान देते हैं। उन्होंने कहा, “हो सकता है कि वह पर्वत भगवान की उंगली पर टिका हो, लेकिन वह उंगली तब तक नहीं चलती, जब तक लोगों ने उसे अपना समर्थन नहीं दिया। मंदिर भी इसी तरह बना है। ”
उन्होंने सनातन धर्म के पुनरुत्थान को भारत के पुनरुत्थान से जुड़ा हुआ बताया और कहा कि यह विचार 150 साल पहले योगी अरविंद ने व्यक्त किया था। उन्होंने कहा कि हर एक योगदान दैवीय मार्गदर्शन में इस संकल्प को मजबूत करता है।
श्री भागवत ने पुनरुत्थान की प्रक्रिया को 1857 से जोड़ते हुए 2014 के लोकसभा चुनावों का भी जिक्र किया,
जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने सत्ता संभाली थी।
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि हिंदुस्तान को एक हिंदू राष्ट्र मानने के विचार का कभी मजाक उड़ाया जाता था, लेकिन अब इसे स्वीकार किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “ जो पहले से ही एक सच्चाई है, उसे घोषित करने
की कोई जरूरत नहीं है। जिस तरह सूरज पूरब से उगता है, उसी तरह भारत एक हिंदू राष्ट्र है। ”
