नयी दिल्ली, 28 अप्रैल (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने हौज खास स्थित दिल्ली के ए. एन. झा डियर पार्क से हिरणों को राजस्थान के टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित करने की अनुमति दे दी है और इसके साथ ही अदालत ने देश भर में वन्यजीवों के स्थानांतरण के लिए व्यापक दिशा-निर्देश भी निर्धारित किए हैं।
केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) के निष्कर्षों को स्वीकार करते हुए न्यायालय ने कार्यवाही को बंद कर दिया और अधिकारियों को वैज्ञानिक तथा समयबद्ध स्थानांतरण योजना लागू करने का निर्देश दिया।
न्यायालय ने सोमवार को कहा कि संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया जाता है कि वे ए. एन. झा डियर पार्क से हिरणों के स्थानांतरण के लिए केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति की देखरेख में और समिति द्वारा तैयार किए गए पशु स्थानांतरण के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करते हुए समयबद्ध तरीके से आवश्यक कदम उठाएं।
यह मामला नयी दिल्ली के ए. एन. झा डियर पार्क से सैकड़ों हिरणों को राजस्थान के मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को चुनौती देने वाली याचिका से शुरू हुआ था। याचिकाकर्ता (एक पर्यावरण संगठन) ने इस कदम का विरोध किया था और इसके बजाय पार्क के भीतर ही जानवरों के आवास का विस्तार करने की वकालत की थी।
अधिकारियों ने हालांकि स्थानांतरण को सीमित क्षमता, हिरणों की बढ़ती आबादी और अवैध शिकार के जोखिम जैसी पारिस्थितिक चिंताओं के आधार पर उचित ठहराया था।
इससे पहले, दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के इन आश्वासनों को दर्ज करने के बाद मामले का निपटारा कर दिया था कि पार्क में केवल कुछ ही हिरण रखे जाएंगे जबकि शेष को स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
उच्च न्यायालय के फैसले से असंतुष्ट होकर याचिकाकर्ता ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। न्यायालय ने 26 नवंबर, 2025 के अपने आदेश के माध्यम से ए. एन. झा डियर पार्क से राजस्थान में चित्तीदार हिरणों के स्थानांतरण पर रोक लगा दी थी। उस समय न्यायालय ने स्थानांतरण प्रक्रिया के दौरान डीडीए की ओर से लापरवाही को आधार बनाया था।
