स्वच्छता के दावों की पोल खोल रहा गंदगी और कचरे से जूझता धीरज नगर

इंदौर: कई क्षेत्रों में गंदगी की शिकायतें मिलने के बाद नगर निगम द्वारा शहर में स्वच्छता अभियान चलाया गया था, इसके अंतर्गत बैकलाइन की सफाई भी महत्वपूर्ण थी, क्योंकि इससे होने वाली समस्याओं का निदान किया जाना जरूरी था, लेकिन आज भी कई क्षेत्रों में बैकलाइन की स्थिति ज्यों की त्यों है. सफाई अभियान के बाद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा क्षेत्र की नियमित मॉनिटरिंग न होने से स्थिति फिर से खराब हो गई है. नगर निगम अधिकारियों को फिर से क्षेत्र का निरीक्षण कर उचित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए.

बैकलाइन में अक्सर ठोस कचरा (प्लास्टिक, निर्माण सामग्री) जमा होता है, जिसे केवल हाथों से या साधारण सफाई से नहीं हटाया जा सकता. इसे बड़ी सक्शन मशीनों से हटाया जाना चाहिए. कई जगहों पर लोगों ने बैकलाइन के ऊपर या आसपास पक्के निर्माण कर लिए हैं, जिससे सफाई मशीनें वहां तक नहीं पहुंच पातीं. घरों से निकलने वाला कचरा, डिस्पोजेबल बर्तन और अन्य गंदगी बैकलाइन में डालने की लोगों की आदत के कारण सफाई के तुरंत बाद फिर से गंदगी जमा हो जाती है. सफाई अभियान के बाद क्षेत्र की नियमित मॉनिटरिंग न होने से स्थिति फिर से खराब हो जाती है.
एक तरफ शहर को स्वच्छता में नंबर वन बनाए रखने के दावे लगातार किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है. ऐसी ही अनदेखी और लापरवाही का मामला रिंग रोड स्थित रोबोर्ट चौराहे से करीब एक किलोमीटर अंदर स्थित वार्ड 40 अंतर्गत आने वाले धीरज नगर में एक बार फिर सामने आया है. धीरज नगर में बैकलाइन की बदहाल स्थिति से रहवासी परेशान हैं.

बैकलाइन की नियमित सफाई नहीं होने से इसमें 12 महीने गंदगी और कचरा जमा रहता है. इस कारण क्षेत्र में मच्छर-मक्खियों का प्रकोप बना रहता है, जिससे क्षेत्र में बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है. इसका सबसे अधिक असर छोटे बच्चों पर पड़ रहा है, जो बार-बार बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं. बरसात के मौसम में तो क्षेत्रवासियों की मुसीबतें और बढ़ जाती हैं. हल्की बारिश होते ही बैकलाइन की गंदगी सड़कों पर बहने लगती है, जिससे रहवासी परेशान होते हैं. कई बार शिकायत के बावजूद सफाईकर्मी ध्यान नहीं देते. क्षेत्रीय पार्षद भी इस समस्या की ओर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं.

यह बोले रहवासी

स्वच्छता के दावे सिर्फ कागजों में दिखते हैं, हमारे क्षेत्र में न सफाई होती है न पार्षद आते हैं. समस्या जस की तस बनी हुई है और लोग परेशान हैं.
– कल्याण सिंह यादव

नियमित तौर पर सफाई नहीं होने के कारण गंदगी बनी रहती है. मच्छर-मक्खियों के कारण बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है, वे बीमारियों से घिरे रहते हैं. शिकायत के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती.
– तेजू बाई

बरसात में बैकलाइन का गंदा पानी सड़क पर आ जाता है. बदबू, गंदगी और बीमारी के बीच जीना मजबूरी बन गया है. जिम्मेदार ध्यान ही नहीं दे रहे.
– दुर्गेश गुर्जर

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