
खंडवा। पारिवारिक संवाद की कमी जहां बच्चों को भटकाव की ओर ले जा सकती है, वहीं समय पर संवेदनशील हस्तक्षेप उन्हें सही दिशा में वापस ला सकता है। ऐसा ही एक मामला खंडवा में सामने आया, जहां उत्तरप्रदेश के गाजीपुर की 16 वर्षीय नाबालिग बच्ची को बाल कल्याण समिति ने काउंसलिंग के बाद सुरक्षित रूप से उसके परिजनों को सौंप दिया।
मामले की जानकारी मिलते ही समिति ने बच्ची को संरक्षण में लिया और उसकी मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग कराई। पूछताछ में सामने आया कि माता-पिता के साथ संवाद की कमी, अत्यधिक रोक-टोक और भावनात्मक दूरी के चलते बच्ची घर छोड़कर निकल गई थी।
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष प्रवीण शर्मा के नेतृत्व में हुई काउंसलिंग के दौरान बच्ची की भावनाओं को समझा गया और अभिभावकों को भी जागरूक किया गया। समिति ने माता-पिता को समझाया कि बच्चों के समुचित विकास के लिए संवाद, विश्वास और समय देना बेहद जरूरी है।
समिति ने अभिभावकों को सकारात्मक माहौल बनाने, बच्ची की भावनाओं का सम्मान करने और नियमित संवाद बनाए रखने की सलाह दी। इसके बाद बच्ची को इस आश्वासन के साथ परिवार को सुपुर्द किया गया कि भविष्य में उसे पर्याप्त समय और सहयोग मिलेगा।
बच्ची के पिता पेशे से ड्राइवर हैं, जबकि माता गृहिणी हैं। इस दौरान समिति के सदस्य मोहन मालवीय, रुचि पाटिल, स्वप्निल जैन और कविता पटेल भी उपस्थित रहे।
