
खंडवा/ओंकारेश्वर। ओंकारेश्वर में आयोजित पांच दिवसीय आदि शंकराचार्य प्रकटोत्सव “एकात्म पर्व” का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य का अद्वैत दर्शन भारतीय संस्कृति, धर्म और आध्यात्मिक एकता का मूल आधार है तथा ओंकारेश्वर एकात्मता के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने अद्वैत लोक एवं अक्षर ब्रह्म प्रदर्शनी का अवलोकन किया और वैदिक अनुष्ठान में भाग लिया। इस अवसर पर स्वामी सदानंद सरस्वती, पद्मश्री निवेदिता भिड़े सहित संत एवं विद्वान उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन राज्य संस्कृति विभाग एवं आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास द्वारा 17 से 21 अप्रैल तक किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने “वेदांत सिद्धांत चंद्रिका-विद उद्गार” पुस्तक का विमोचन तथा एकात्म धाम की वेबसाइट का लोकार्पण भी किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की भूमि भगवान राम, श्रीकृष्ण और आदि शंकराचार्य के चरणों से पावन हुई है, जिससे यह प्रदेश आध्यात्मिक विरासत का केंद्र बना है।
स्वामी सदानंद सरस्वती ने एकात्मता की व्याख्या करते हुए कहा कि ब्रह्म, भगवान और आत्मा एक ही तत्व हैं तथा प्राणी मात्र में विद्यमान आत्मा ही एकता का आधार है। वहीं निवेदिता भिड़े ने मनुष्य शरीर को एकात्म का श्रेष्ठ उदाहरण बताते हुए कहा कि अनेक अंग होने के बावजूद चेतना एक ही रहती है।
कार्यक्रम में बताया गया कि 21 अप्रैल को दीक्षा समारोह में 700 से अधिक युवा “शंकर दूत” के रूप में संकल्प लेंगे। साथ ही जनवरी 2027 से आचार्य शंकर के जन्मस्थान से एकात्म यात्रा प्रारंभ की जाएगी।
ओंकारेश्वर में विकसित हो रहे “एकात्म धाम” और अद्वैत लोक संग्रहालय के माध्यम से इस क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
