इंदौर: शहर का प्रसिद्ध मेघदूत गार्डन, जो कभी अपनी सुंदरता और उत्कृष्ट व्यवस्थाओं के लिए जाना जाता था, अब धीरे-धीरे अव्यवस्थाओं का शिकार होता जा रहा है. कई एकड़ में फैले इस गार्डन की वर्तमान स्थिति लोगों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है.गार्डन में पीने के पानी की व्यवस्था बेहद खराब है. यहां केवल तीन आरओ मशीनें ही चालू हैं, जिनमें टैंकर से टंकी में पानी भरा जाता है. बीच गार्डन में लगा आरओ खराब पड़ा है. जबकि पक्के बनाए गए प्याऊ की हालत जर्जर हो चुकी है. ऊंचाई पर स्थित पानी की टंकी में आरओ सिस्टम तक नहीं लगाया गया है और इसे सीधे बोरिंग के पानी से भरा जा रहा है, जिसे लोग पीने के लिए मजबूर हैं.
हैरानी की बात यह है कि टंकी की सफाई कब हुई, इसकी कोई तारीख तक दर्ज नहीं है. सुरक्षा के लिहाज से भी गार्डन लापरवाही का शिकार है. पीछे की ओर लगी सुरक्षा जाली कई जगह से टूटी हुई है, जिससे असामाजिक तत्वों का कभी भी प्रवेश संभव है और गार्डन को नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहता है. गार्डन में बनाया गया आर्टिफिशियल झरना भी लंबे समय से बंद पड़ा है. इसके नीचे बने गड्ढे में पानी सड़ रहा है, जिससे दुर्गंध और स्वास्थ्य संबंधी खतरे उत्पन्न हो सकते हैं हैं. स्वच्छता व्यवस्था भी चरमराई हुई है. अधिकांश डस्टबिन टूटे पड़े हैं, जिसके चलते लोग कचरा- जैसे प्लास्टिक बोतलें और स्नैक्स के रैपर- इधर-उधर फेंकने को मजबूर हैं, जिससे गार्डन की साफ-सफाई पर बुरा असर पड़ रहा है.
टिकट केवल ऑनलाइन उपलब्ध
इसके अलावा, गार्डन में प्रवेश के लिए 5 रुपए का टिकट केवल ऑनलाइन ही उपलब्ध है, जिससे विशेष रूप से बच्चों और महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कई लोगों के पास ऑनलाइन भुगतान की सुविधा नहीं होने के कारण उन्हें दूसरों की मदद लेनी पड़ती है. जबकि टिकट खिड़की पर दो कर्मचारी मौजूद रहते हैं, फिर भी ऑफलाइन टिकट की सुविधा उपलब्ध नहीं है.
डस्टबिन के टेंडर हुए समाप्त
इस पूरे मामले में गार्डन ऑफिसर शांतिलाल यादव से बात की गई. उन्होंने डस्टबिन के लिए टेंडर समाप्त होने की बात कही. पानी की टंकी में टैंकर से पानी भरने और सफाई की तारीख नहीं लिखे जाने पर उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द सफाई करवा कर तारीख अंकित कराई जाएगी. वहीं, टूटे हुए विद्युत पोल के संबंध में उन्होंने इसे विद्युत विभाग को दिखाने की बात कही और स्वयं केवल पेड़-पौधों एवं सामान्य मेंटेनेंस की जिम्मेदारी होने की बात दोहराई.
प्रशासनिक उदासीनता उजागर
कुल मिलाकर, शहर के प्रमुख गार्डनों में शामिल मेघदूत गार्डन की बदहाल स्थिति प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करती है. यदि समय रहते व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया, तो यह गार्डन अपनी पहचान और आकर्षण खो सकता है.
