नयी दिल्ली, 15 अप्रैल (वार्ता) कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण मार्च में थोक मूल्य आधारित मुद्रास्फीति की दर बढ़कर 3.88 प्रतिशत पर पहुंच गयी। पिछले साल मार्च में यह आंकड़ा 2.25 प्रतिशत और इस साल फरवरी में 2.13 प्रतिशत था। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च में कच्चे तेल की कीमत सालाना आधार पर 51.57 प्रतिशत बढ़ी। कच्चे तेल में जबरदस्त उछाल के कारण प्राथमिक वस्तु वर्ग में थोक महंगाई
की दर 6.36 प्रतिशत दर्ज की गयी। थोक मुद्रास्फीति में सबसे अधिक 64 प्रतिशत का भारांश रखने वाले विनिर्मित वस्तुओं के वर्ग में भी मुद्रास्फीति एक साल पहले के 3.21 प्रतिशत से बढ़कर 3.39 प्रतिशत पर पहुंच गयी।
तिलहनों के थोक दाम भी सालाना आधार पर 22.81 प्रतिशत बढ़े और महंगाई बढ़ाने में इनका भी योगदान रहा।पेट्रोल और डीजल के दाम में साल-दर-साल क्रमशः 2.50 प्रतिशत और 3.26 प्रतिशत की वृद्धि हुई। एलपीजी की थोक कीमत हालांकि एक साल पहले के मुकाबले 1.54 प्रतिशत कम रही।
खाने-पीने की वस्तुओं में अनाजों के दाम 2.51 प्रतिशत कम हुए हैं। सब्जियों की मुद्रास्फीति 1.45 प्रतिशत दर्ज की गयी है। फलों के दाम 2.11 प्रतिशत और दूध के 2.62 प्रतिशत बढ़े हैं। अंडा, मांस और मछली की महंगाई दर 6.63 प्रतिशत रही। गत 28 फरवरी को शुरू हुए पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल के दाम में तेज उछाल देखा गया है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इस संकट से पहले कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब है। इससे देश में भी थोक महंगाई बढ़ी है।

