मुंबई | मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कमजोर वैश्विक संकेतों के कारण हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। सोमवार को बीएसई (BSE) सेंसेक्स 702.68 अंक यानी 0.91% की गिरावट के साथ 76,847.57 के स्तर पर आ गया। वहीं, एनएसई (NSE) निफ्टी50 भी 207.95 अंक टूटकर 23,842.65 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय सेंसेक्स 1,600 अंकों से भी ज्यादा नीचे गिर गया था, लेकिन निचले स्तरों पर हुई मामूली खरीदारी ने बाजार को और अधिक गिरने से बचा लिया।
सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी ऑटो इंडेक्स में सबसे ज्यादा 2.09% की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा आईटी, एफएमसीजी और बैंकिंग सेक्टर में भी निवेशकों ने जमकर बिकवाली की। आयशर मोटर्स, मारुति सुजुकी और रिलायंस जैसे बड़े शेयरों में 2 से 5 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका-ईरान युद्धविराम वार्ता के विफल होने और कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिससे बाजार में जोखिम की स्थिति पैदा हो गई है।
बाजार जानकारों के अनुसार, घरेलू बाजार अब एक सतर्क और जोखिम-संवेदनशील चरण में प्रवेश कर चुका है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और रुपये की कमजोरी कंपनियों के मार्जिन पर असर डाल सकती हैं। हालांकि, आरएसआई (RSI) जैसे तकनीकी संकेतक अभी भी निचले स्तरों पर खरीदारी का संकेत दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक निफ्टी 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर स्थिर नहीं होता, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी और निवेशक फूंक-फूंक कर कदम रखेंगे।

