इंदौर:शहर में स्मार्ट सिटी के दावों के बीच खुले नाले और उन पर नगर निगम की लापरवाही लोगों के लिए मुसीबत बन गई है. भागीरथपुरा जैसे क्षेत्रों में गंदा पानी पीने से बीमारियां फैल रही हैं, वहीं कान्हा नदी (नाले) में सफाई के बजाय गंदगी फेंके जाने के वीडियो वायरल हो रहे हैं. भूजल में सीवर का पानी मिलने की खबरें हालात को चिंताजनक बता रही हैं.जूनी इंदौर क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 61 में सोनकर समाज धर्मशाला के सामने जबरन कॉलोनी और अलापुर के बीच स्थित नाला इसका उदाहरण है. कुछ वर्ष पहले इस नाले का गहरीकरण कर चारों ओर पक्की दीवार बनाई गई, लेकिन इसे ऊपर से खुला रखा गया, जो स्थानीय लोगों के लिए मुसीबत बन गया है.
यहां गंदगी जमा होने से मच्छर-मक्खी और कीड़े-मकोड़ों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है. दोनों क्षेत्रों के बीच बनी छोटी पुलिया में रोजाना बहकर आने वाला कचरा फंस जाता है, जिसे सफाई कर्मी केवल औपचारिक सफाई कर शेष कचरा वहीं छोड़ देते हैं. इससे पानी का बहाव बाधित होकर जलभराव की स्थिति बन जाती है. बरसात के दिनों में स्थिति और विकट हो जाती है, जब गंदा पानी सड़कों और आसपास के घरों तक पहुंचने लगता है. बदबू और अस्वच्छता से रहवासियों का जीवन प्रभावित हो रहा है. स्थानीय लोगों ने कई बार शिकायत की, लेकिन जिम्मेदार विभाग की अनदेखी जारी है.
रहवासियों का कहना…
कचरा गाड़ी नहीं आती, अंधेरे में लोग घरों का कचरा नाले में फेंक देते हैं. सफाई कर्मी भी वह कचरा पुलिया के नीचे कर देते हैं, जिससे गंदगी और बढ़ जाती है. इसके लिए कैमरा लगाया जाए.
– कांता वर्मा
शाम से पूरी रात मच्छर हमला बोलते रहते हैं. साथ ही इतनी बदबू आती है कि नाक के कीड़े मर गए, सफाई नाम की चीज नहीं, नाले को या ढंक दिया जाए या इसमें बड़े पाइप डाल दिए जाएं तो इस समस्या से राहत मिल सकती है.
– नवीन सिंगारे
सफाई कर्मी कचरा पुलिया के नीचे कर देते हैं, हम कहते हैं कि उसको बाहर निकालकर ढेर लगाया करो, बड़ी गाड़ी आकर ले जाएगी, लेकिन वे नहीं सुनते. इससे कई तरह की समस्या हो रही है.
– रेखा बाई
