नई दिल्ली | गुरुवार को कमोडिटी मार्केट (MCX) में कीमती धातुओं पर भारी दबाव देखा गया, जिससे सोने और चांदी के किले ढहते नजर आए। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर चांदी की कीमतों में करीब 2% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद यह ₹2,35,133 प्रति किलो के स्तर पर आ गई। वहीं, सोना भी 0.7% यानी ₹1,129 की कमजोरी के साथ ₹2,39,918 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी इसी तरह का सुस्त रुख रहा, जहां स्पॉट सिल्वर और गोल्ड दोनों ही वैश्विक दबाव के कारण निचले स्तरों पर कारोबार करते दिखे।
सोने-चांदी की कीमतों में इस बड़ी गिरावट के पीछे तीन प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम को लेकर बढ़ती अनिश्चितता और इजरायल-लेबनान संघर्ष है, जिसने निवेशकों को सुरक्षित निवेश से दूर कर दिया है। इसके अलावा, कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों का $97 प्रति बैरल के पार पहुंचना भी एक बड़ा कारक है। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने का खतरा है, जिससे केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरें ऊंची रखने की संभावना बढ़ गई है। अंततः, मजबूत डॉलर ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मांग को और कम कर दिया है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान में सोने-चांदी की चाल पूरी तरह से वैश्विक खबरों और आगामी अमेरिकी महंगाई (PCE) आंकड़ों पर टिकी है। ऑगमोंट की रिसर्च हेड रेनीशा चैनानी के अनुसार, यदि चांदी $76.5 के स्तर को पार करती है, तो इसमें दोबारा मजबूती आ सकती है। हालांकि, मौजूदा उतार-चढ़ाव को देखते हुए विशेषज्ञों ने निवेशकों को एक साथ बड़ा निवेश न करने और सतर्क रहने की सलाह दी है। जब तक भू-राजनीतिक हालात सामान्य नहीं होते, तब तक कीमती धातुओं के बाजार में अस्थिरता बनी रहने की पूरी संभावना है।

