बुधनी। विद्यार्थियों को सस्ती दरों पर कॉपी-किताबें उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आयोजित पुस्तक मेला उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया. तीसरे दिन मेले की स्थिति निराशाजनक रही और आयोजन लगभग एक स्टॉल तक सिमटकर रह गया.
नए शिक्षा सत्र को ध्यान में रखते हुए स्थानीय स्तर पर विद्यार्थियों और अभिभावकों को राहत देने के उद्देश्य से सांदीपनि विद्यालय में आयोजित चार दिवसीय पुस्तक मेला तीसरे दिन पूरी तरह फ्लॉप नजर आया. सोमवार से शुरू हुए इस मेले में शुरुआती दिनों से ही अपेक्षित भीड़ नहीं जुट सकी, लेकिन तीसरे दिन स्थिति और भी खराब हो गई. जहां आयोजन में लगभग 10 स्टॉल लगाए जाने थे, वहीं तीसरे दिन केवल एक ही विक्रेता अपनी दुकान के साथ मौजूद रहा. बाकी सभी स्टॉल खाली पड़े रहे, जिससे मेले का स्वरूप ही खत्म होता नजर आया. सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक निर्धारित समय के बावजूद दोपहर बाद मेले में सन्नाटा पसरा रहा और गिने-चुने लोग ही वहां दिखाई दिए.
जानकारों का मानना है कि मेले के असफल होने का मुख्य कारण इसका समय रहा. नया शिक्षण सत्र 1 अप्रैल से शुरू हो चुका था, जबकि मेले का आयोजन उसके करीब पांच दिन बाद किया गया. अधिकांश अभिभावक पहले ही बाजार से किताबें और कॉपियां खरीद चुके थे, जिससे मेले की उपयोगिता कम हो गई. इस संबंध में विकासखंड शिक्षा अधिकारी शशि सिंह ने बताया कि मेले का उद्देश्य लोगों को एक ही स्थान पर शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराना था, लेकिन विक्रेताओं की कम भागीदारी और अभिभावकों की सीमित उपस्थिति के कारण अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाए. पुस्तक विक्रेताओं का कहना है कि मेले को लेकर न तो पर्याप्त प्रचार-प्रसार किया गया और न ही लोगों में कोई खास उत्साह देखने को मिला, जिससे उन्होंने भी सीमित भागीदारी ही दिखाई.
