चुनाव आयोग ने एसआईआर के दौरान धार्मिक एवं धर्मार्थ संस्थाओं को भी नहीं बख्शा- ममता

कोलकाता, 07 अप्रैल (वार्ता) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में ‘विचाराधीन’ मतदाताओं की पूरी सूची जारी किए जाने के बाद मंगलवार को चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि राज्य में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान धार्मिक और धर्मार्थ संस्थाओं के सदस्यों को भी नहीं बख्शा गया है।

सुश्री बनर्जी ने नदिया और उत्तर 24 परगना में तीन चुनावी जनसभाओं को संबोधित करते हुए आयोग पर निशाना साधा और कहा कि यह प्रक्रिया चुनिंदा तरीके से संचालित की जा रही है। उन्होंने विशेष रूप से रामकृष्ण मठ, रामकृष्ण मिशन और मिशनरीज ऑफ चैरिटी का जिक्र करते हुए इन संस्थानों से जुड़े नामों को हटाए जाने पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि मिशनरीज ऑफ चैरिटी से जुड़े लगभग 300 लोगों के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, “मुझे यह सुनकर गहरा दुख हुआ है कि इन संस्थाओं में सेवा करने वाले लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। यहाँ तक कि रामकृष्ण मठ और मिशन के संन्यासियों को भी नहीं छोड़ा गया।”

आयोग की ओर से सोमवार देर रात जारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य भर में कुल 60 लाख, छह हजार, 675 लोगों के नाम विचाराधीन श्रेणी में रखे गए थे। इनमें से 32 लाख, 68 हजार, 119 व्यक्तियों (54.4 प्रतिशत) को पात्र पाया गया और उनके नाम सूची में बरकरार रखे गए, जबकि 27 लाख, 16 हजार, 393 व्यक्तियों (45.2 प्रतिशत) को अपात्र घोषित कर सूची से हटा दिया गया है। इस नई पूरक सूची के साथ, सात अप्रैल तक हटाए गए नामों की कुल संख्या 90 लाख, 83 हजार, 345 तक पहुँच गई है।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया का सबसे बुरा असर उन जिलों पर पड़ा है जहाँ अल्पसंख्यकों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की आबादी अधिक है। उनके अनुसार, मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण 24 परगना, उत्तर 24 परगना और नदिया में सबसे ज्यादा नाम हटाए गए हैं। उन्होंने विशेष रूप से बनगाँव उपमंडल के मतुआ समुदाय और नदिया के चकदहा व हरिणघाटा क्षेत्रों का जिक्र किया जहाँ बड़े पैमाने पर नाम काटे गए हैं।

अपने संबोधन के दौरान श्री बनर्जी ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि कई निर्वाचन क्षेत्रों में उसका भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ ‘अंदरूनी समझौता’ है। उन्होंने कहा कि वामपंथी दल भाजपा विरोधी वोटों को बांटने की कोशिश कर रहे हैं ताकि परोक्ष रूप से भाजपा की मदद हो सके।

साथ ही, मुख्यमंत्री ने उन मतदाताओं को आश्वासन दिया जिनके नाम हटा दिए गए हैं। उन्होंने वादा किया कि तृणमूल कांग्रेस उनकी सहायता करेगी और शिकायत निवारण के लिए बनाए गए अपीलीय न्यायाधिकरणों तक पहुँचाने में उनका मार्गदर्शन करेगी। उन्होंने दोहराया कि भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर चुनिंदा तरीके से मतदाताओं को हटाने का काम कर रहे हैं, लेकिन उनकी यह कोशिश सफल नहीं होगी।

 

 

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