
जबलपुर। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने आदेश जारी कर निलंबित सीएमएचओ डॉ संजय मिश्रा के स्थान पर जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ नवीन कोठारी को तत्काल प्रभाव से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के अधीन निहित समस्त दायित्वों का प्रभार सौंप दिया है। डॉ. कोठारी अब सीएमएचओ के दायित्वों का निर्वहन राज्य शासन द्वारा नियमित पदस्थापना किये जाने अथवा आगामी आदेश तक करेंगे। निलंबित मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ संजय मिश्रा को वर्तमान दायित्वों से मुक्त कर दिया गया है। इसके पहले डॉ. नवीन कोठारी सिविल सर्जन बतौर अपनी सेवाएं दे रहे थे।
जिला चिकित्सालय विक्टोरिया में प्रशासनिक फेरबदल के तहत वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर नवीन कोठारी ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के रूप में अपना कार्यभार ग्रहण किया। उनके कार्यभार संभालने के अवसर पर अस्पताल परिसर में एक औपचारिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न अधिकारियों और अधीनस्थ कर्मचारियों ने डॉक्टर कोठारी का आत्मीय स्वागत किया। इस दौरान उपस्थित स्टाफ ने उन्हें पुष्प गुच्छ भेंट कर नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
इसलिए किया गया फेरबदल…
गौरतलब है कि डॉ. संजय मिश्रा को निलंबित करते हुए मुख्यालय भोपाल संभाग के क्षेत्रीय संचालक कार्यालय में अटैच किया गया है। दरअसल सीएमएचओ कार्यालय में फर्जी देयकों के माध्यम से भुगतान किए जाने की शिकायतों के बाद जांच शुरू की गई थी। डिप्टी कलेक्टर रघुवीर सिंह मरावी के नेतृत्व में गठित टीम ने पाया कि भोपाल की सिंह इंटरप्राइजेज कंपनी को 12 फर्जी बिलों के जरिए करीब 93.04 लाख रुपए का भुगतान किया गया है, जबकि संबंधित सामग्री कभी प्राप्त ही नहीं हुई। जिसके बाद डॉ संजय मिश्रा पर गाज गिर गई थी।
ये रहेंगीं प्राथमिकताएं
सीएमएचओ का प्रभार संभालने के बाद डॉ. नवीन कोठारी ने नवभारत से चर्चा के दौरान कहा कि उनकी प्राथमिकताओं में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, कर्मचारियों की टीम को संगठित रूप से कार्य करने के लिए संकल्पित करना, जिले में दर्वाइयों व अन्य उपकरणों की उपलब्धता व उसका वैरिफिकेशन करना,
और स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को आदिवासी बस्तियों में क्रियान्वित करना है।
कुछ इस तरह की रहेंगी चुनौतियां
स्वास्थ्य विभाग में करोड़ों के घोटाले के बाद डॉ. नवीन कोठारी को अब हर कदम फूंक-फंूककर रखना होगा। जानकारी के अनुसार जबलपुर जिले की 56 डिस्पेंसरियों के खस्ता हाल, दवा खरीदी घोटाला, कर्मचारियों की ई अटैंडेंस सहित कुछ अन्य मामले चुनौती के रूप में डॉ कोठारी के सामने पहले से ही खड़े हैं। उन्हें हर मामले को न सिर्फ बरीकी से समझना होगा, बल्कि आने वाले दिनों में इसी समझ का परिचय देकर खरीद, बिल भुगतान की प्रक्रिया पर पैनी निगाह रखनी होगी। इसके साथ ही जिले की तमाम डिस्पेंसरियों, संजीवनी क्लीनिकों के हाल भी दुरुस्त कर उन्हें पटरी पर लाने होंगे।
