
भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य की खाद्यान्न उपार्जन, भंडारण और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था में व्यापक भ्रष्टाचार, प्रशासनिक विफलता और राजनीतिक संरक्षण के गंभीर आरोप लगाते हुए इसे “संगठित लूट” करार दिया है, जो किसानों के अधिकारों और खाद्य सुरक्षा को खतरे में डाल रही है।
उन्होंने दावा किया कि रायसेन जिले के वेयरहाउसों में लगभग 20,000 मीट्रिक टन गेहूं, जिसे 35 करोड़ रुपये की लागत से खरीदा गया था, सड़ने के लिए छोड़ दिया गया। रखरखाव और कीटनाशक के नाम पर इसकी लागत 150 करोड़ रुपये तक पहुंचा दी गई। 34 बार छिड़काव के बावजूद अनाज के खराब हो जाने को उन्होंने फर्जी बिलिंग और अधिकारियों-ठेकेदारों की मिलीभगत का परिणाम बताया।
पटवारी ने कहा कि यह समस्या व्यापक है। पिछले चार वर्षों में प्रदेश में 10 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं सड़ चुका है, जिससे लगभग 200 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
जबलपुर और सिवनी में सामने आए “घोस्ट ट्रांसपोर्ट” घोटाले का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि 92 प्रतिशत ट्रिप फर्जी थीं, जिनमें स्कूटर जैसे वाहनों से भारी मात्रा में अनाज ढोने का दावा किया गया।
उन्होंने वेयरहाउस आवंटन में पक्षपात और भुगतान में अनियमितताओं का भी आरोप लगाया। 26 प्रतिशत से अधिक बच्चों में कुपोषण का हवाला देते हुए उन्होंने स्थिति को गंभीर बताया।
कांग्रेस ने मामले की फोरेंसिक जांच, आवंटन में पारदर्शिता, दोषियों पर आपराधिक कार्रवाई, नुकसान की भरपाई और सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सख्त गुणवत्ता नियंत्रण की मांग की है।
