रात में खुली विधानसभा पर सियासी संग्राम, भारती की सजा के बाद सदस्यता खत्म करने का प्रयास कर रही सरकार: कांग्रेस

भोपाल: राजधानी में गुरुवार देर रात राजनीतिक हलचल उस समय तेज हो गई जब कांग्रेस ने एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि भाजपा के दबाव में विधानसभा सचिवालय को रात में खोला गया और कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त करने की कार्रवाई शुरू की गई। कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताते हुए सरकार और प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

दरअसल, दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार को कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को तीन साल की सजा का फैसला सुनाया। हालांकि कोर्ट ने उन्हें अपील के लिए 60 दिन का समय देते हुए सजा पर अंतरिम राहत भी दे दी। इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई और शाम होते-होते मामला विधानसभा तक पहुंच गया।कांग्रेस के अनुसार, विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा रात में अचानक विधानसभा पहुंचे, जिसके बाद सचिवालय खोला गया। बताया जा रहा है कि भारती की सीट को रिक्त घोषित करने के लिए चुनाव आयोग को पत्र भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई, हालांकि इस संबंध में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर या प्रमुख सचिव शर्मा की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

घटनाक्रम की जानकारी मिलते ही कांग्रेस नेता सक्रिय हो गए। सबसे पहले पूर्व मंत्री पीसी शर्मा और फिर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी विधानसभा पहुंचे और अधिकारियों से देर रात सचिवालय खोलने को लेकर सवाल-जवाब किया। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है और भाजपा के इशारे पर की जा रही है।पीसी शर्मा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब विधानसभा चलनी चाहिए थी तब उसे नहीं चलाया गया, लेकिन अब आनन-फानन में सदस्यता समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस मामले में शामिल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। वहीं जीतू पटवारी ने भी आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है, जिसे कांग्रेस पूरी मजबूती से चुनौती देगी।
दूसरी ओर, कानूनी पहलुओं पर नजर डालें तो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत दो साल या उससे अधिक की सजा होने पर जनप्रतिनिधि की सदस्यता समाप्त हो जाती है। हालांकि तीन साल की सजा के मामले में अपील के लिए 60 दिन का समय देने का प्रावधान भी है। ऐसे में राजेंद्र भारती के पास राहत के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का विकल्प मौजूद है और वे अगले दो दिनों में दिल्ली हाई कोर्ट में अपील दाखिल कर सकते हैं।इस पूरे घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है, जहां इसे लेकर सियासी आरोप-प्रत्यारोप भी चरम पर पहुंच गए हैं।

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