
भोपाल। मसीही समाज द्वारा प्रभु यीशु मसीह के क्रूस पर बलिदान से पूर्व की घटनाओं को स्मरण करते हुए शहर के सेंट जॉन चर्च में विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं को प्रभु यीशु के अंतिम भोज और उनके द्वारा दिए गए सेवा एवं विनम्रता के संदेश की याद दिलाई गई।
धार्मिक प्रवचन के दौरान बताया गया कि क्रूस पर चढ़ाए जाने से पहले प्रभु यीशु मसीह ने अपने शिष्यों के साथ अंतिम भोज ग्रहण करने की इच्छा व्यक्त की थी। इस दौरान उन्होंने अपने शिष्यों के पांव धोकर सेवा और विनम्रता का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने यह संदेश दिया कि जो व्यक्ति नेतृत्व करना चाहता है, उसे पहले दूसरों का सेवक बनना चाहिए।
प्रवचन में यह भी बताया गया कि प्रभु यीशु ने रोटी को तोड़कर उसे अपनी देह और कटोरे में दाखरस को अपने लहू का प्रतीक बताते हुए शिष्यों को ग्रहण करने के लिए दिया। उन्होंने कहा कि यह बलिदान मानवता के पापों की क्षमा के लिए है।
कार्यक्रम में आर्चडिकॉन रेव. डॉ. अनिल मार्टिन ने अपने संदेश में कहा कि प्रभु यीशु मसीह ने अपने जीवन और बलिदान के माध्यम से सेवा भाव का मार्ग दिखाया। उन्होंने कहा कि मसीही समाज आज भी उसी शिक्षा का पालन करते हुए सेवा, प्रेम और समर्पण के भाव से मानवता की सेवा कर रहा है।
प्रार्थना सभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और उन्होंने प्रभु के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए मानव सेवा का संकल्प लिया।
