
जबलपुर। मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के संबंधित दायर याचिकाओं पर 27 अप्रैल से तीन दिनों तक नियमित सुनवाई होगी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने सभी संबंधित पक्षकारों को नियमित सुनवाई के तीन दिन पूर्व तक दस्तावेज प्रस्तुत करने के आदेश जारी किये हैं ।
गौरतलब है कि प्रदेश में ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किये जाने के पक्ष तथा विपक्ष में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कुछ याचिकाओं की सुनवाई करते हुए ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिये जाने पर रोक लगा दी थी। विपक्ष में दायर याचिका में कहा गया था कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इंदिरा साहनी तथा मराठा आरक्षण के संबंध में दायर याचिकाओं में स्पष्ट कहा गया है कि आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होने चाहिये। कुछ याचिकाओं में याचिकाओं में फार्मूला 87ः13 को चुनौती देते हुए 13 प्रतिशत होल्ड पदों पर आपत्ति की गयी थी। पक्ष में दायर की गयी याचिकाओं में आबादी के अनुपात में आरक्षण की मांग की गयी थी।
याचिकाओं पर पिछली सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया था कि सर्वोच्च न्यायालय ने ओबीसी आरक्षण के संबंध में दायर एसएलपी को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट वापस भेजते हुए सुनवाई के निर्देश दिये थे। सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश जारी किये है कि प्रकरणों की सुनवाई के लिए विशेष बेंच का गठन किया जाये। विशेष न्यायालय तीन माह में याचिका का निराकरण करें। युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए सभी पक्षकारों को 15 अप्रैल तक दस्तावेज प्रस्तुत करने के आदेश जारी किये थे।
याचिका पर गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान आरक्षण के खिलाफ दायर की गयी याचिकाओं की तरफ से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने युगलपीठ को बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने तीन माह में संबंधित याचिकाओं के निराकरण करने निर्देश जारी किये है। जिसमें से डेढ़ माह का समय गुजर गया है। प्रदेश सरकार की तरफ से उपस्थित एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज,महाधिवक्ता प्रशांत सिंह तथा ओबीसी आरक्षण के पक्ष में प्रदेश सरकार की तरफ से पैरवी कर रहे रामेश्वर सिंह की सहमति के बाद युगलपीठ ने 27 अप्रैल से तीन दिनों तक दोपहर 12.30 से नियमित सुनवाई के निर्देश दिये है। युगलपीठ ने कहा है कि आवश्यकता होने पर नियमित सुनवाई की अवधि को बढ़ाया जा सकता है। युगलपीठ ने संबंधित पक्षकारों को निर्देशित किया है कि वह सुनवाई के दौरान उपस्थित रहें।
