नयी दिल्ली 01 अप्रैल (वार्ता) केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को राज्यसभा में बताया कि भगोड़े आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 के तहत 08 आरोपियों को दोषी ठहराया गया है और 15,186 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। श्रीमती सीतारमण दिवाला एवं हरियाणा शोधन अक्षमता संशोधन विधेयक 2026 पर सदन में हुई संक्षिप्त चर्चा का जवाब दे रही थी। उन्होंने कहा कि इस जप्त संपत्ति में से 15,183 करोड़ रुपये सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को वापस कर दिए गए हैं। उनके जवाब के बाद सदन ने संशोधन विधायक को ध्वनि मत से पारित कर दिया।
उन्होंने आर्थिक अपराधियों और बैंकों के साथ धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ सरकार की ओर से की जा रही कठोर कार्यवाहियों का उल्लेख करते हुए अपने जवाब में कहा कि दोषी ठहराए गए आठ व्यक्तियों में से 03 को धन शोधन निवारक अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दोषी ठहराया गया है।उन्होंने बताया कि मुंबई के पंजाब एंड महाराष्ट्र सहकारी बैंक(पीएमसी बैंक ) ने ईडी के सहयोग से 104 करोड़ रुपये बरामद किए हैं। भगोड़े आर्थिक अपराधी अधिनियम के प्रावधानों के तहत 725 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है।
श्रीमती सीतारमण ने कहा कि भगोड़े आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 को मोदी की सरकार द्वारा लाया गया था। इसका उद्देश्य आर्थिक अपराधियों को विदेश में रहकर भारतीय कानून से बचने से रोकना था। यह अधिनियम 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक के अपराधों पर लागू होता है। इसके तहत संपत्ति (अपराध की आय) और बेनामी संपत्तियों की ज़ब्ती,आव्रजन ब्यूरो के माध्यम से लुकआउट सर्कुलर तथा पूंजी जुटाने, शेयर या मतदान अधिकार प्राप्त करने पर प्रतिबंध जैसी कार्रवाई की जाती है।
वित्त मंत्री ने बताया कि ईडी ने पीएमएलए के तहत 1,105 बैंक धोखाधड़ी मामलों की जांच की। 64,920 करोड़ रुपये की अपराध की आय जब्त की गई है तथा 150 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और 277 अभियोग शिकायतें दर्ज की गई हैं।
