ईरान युद्ध के बीच स्टार्मर ने बुलाई 35 देशों की बैठक

लंदन, 01 अप्रैल (वार्ता) पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ते हालात, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बाधित नौवहन और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बढ़ते दबाव के बीच ब्रिटेन ने बहुपक्षीय कूटनीतिक पहल तेज करते हुए 35 देशों की बैठक बुलाने की घोषणा की है।

प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने स्पष्ट किया है कि ईरान में चल रही अमेरिका-इजरायल ही सैन्य कार्रवाई ब्रिटेन का युद्ध नहीं है और देश इसमें शामिल नहीं होगा। उन्होंने क्षेत्र में शांति, समुद्री सुरक्षा और आपूर्ति शृंखलाओं की बहाली को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।

श्री स्टार्मर ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है और इसके वैश्विक प्रभाव स्पष्ट रूप से सामने आ रहे हैं। उन्होंने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को एक “महत्वपूर्ण ऊर्जा धमनिका” बताते हुए कहा कि इसके अवरुद्ध होने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार, तेल आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ रहा है।

इसी पृष्ठभूमि में ब्रिटेन इस सप्ताह 35 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करेगा, जिसमें नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने, फंसे हुए जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही फिर से शुरू करने के उपायों पर विचार किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि ब्रिटेन पहले ही 35 देशों को एक संयुक्त बयान के तहत साथ ला चुका है, जिसका उद्देश्य खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना है। इस बैठक में कूटनीतिक और राजनीतिक उपायों के साथ-साथ व्यावहारिक रणनीतियों पर भी चर्चा होगी, ताकि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में बाधा को समाप्त किया जा सके। इसके बाद सैन्य योजनाकारों की एक अलग बैठक भी प्रस्तावित है, जिसमें संघर्ष समाप्त होने के बाद जलडमरूमध्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के विकल्पों का आकलन किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि ब्रिटेन की नीति स्पष्ट रूप से संघर्ष से दूरी बनाए रखने की है। “यह हमारा युद्ध नहीं है, और हम इसमें शामिल नहीं होंगे। हमारा राष्ट्रीय हित शांति, स्थिरता और आर्थिक सुरक्षा में है,”उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ब्रिटेन कूटनीतिक और सामरिक स्तर पर अपने सहयोगियों के साथ मिलकर समाधान खोजने में सक्रिय भूमिका निभाएगा।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच नाटो सहयोगियों के बीच मतभेद भी उभरकर सामने आए हैं, खासकर अमेरिका के रुख को लेकर। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा गठबंधन पर की गयी आलोचनाओं के विपरीत, श्री स्टार्मर ने नाटो को दुनिया का “सबसे प्रभावी सैन्य गठबंधन” बताया और इसकी प्रासंगिकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में यूरोप के साथ घनिष्ठ सहयोग ब्रिटेन के दीर्घकालिक हित में है, चाहे वह रक्षा हो, व्यापार हो या ऊर्जा सुरक्षा।

श्री स्टार्मर ने यह भी कहा कि ब्रिटेन सरकार पहले से ही जी-7 देशों और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ सक्रिय संवाद में है। विदेश सचिव और वित्त मंत्री अपने समकक्षों के साथ लगातार बातचीत कर रहे हैं, जबकि रक्षा मंत्री ने क्षेत्र का दौरा कर सहयोगी देशों के साथ समन्वय स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि इस संकट से निपटने के लिए “सैन्य शक्ति और कूटनीतिक प्रयासों का संयुक्त मोर्चा” आवश्यक है।

श्री स्टार्मर ने अंत में कहा कि यह संकट ब्रिटेन के लिए एक चुनौती के साथ-साथ अवसर भी है, जहां वह अपनी कूटनीतिक क्षमता, आर्थिक नीति और वैश्विक साझेदारियों को मजबूत कर सकता है। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य स्पष्ट है। पश्चिम एशिया में नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करना, अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और भविष्य के लिए एक स्थिर और सुरक्षित आर्थिक ढांचा तैयार करना।”

 

 

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