मध्य क्षेत्र की डायरी
दिलीप झा
गुना जिले में कलेक्ट्रेट में सुनवाई के दौरान उस समय हंगामा हो गया जब बांसखेड़ी घोसीपुरा निवासी युवक ने कलेक्टर को रोककर बोला-कलेक्टर साहब मेरी भी सुन लो।थाने में सुनवाई नहीं होती। मुझे इंसाफ चाहिए। शिकायत कर्ता सूरज ने आरोप लगाया कि विशेष समुदाय के कुछ लोगों ने उन्हें घेर कर मारपीट की। हमलावरों में कुछ महिलाएं भी शामिल थीं। सूरज ने कलेक्टर से यह भी शिकायत की कि कैंट थाना प्रभारी को फोन भी किया लेकिन उन्होंने फोन ही नहीं उठाया। हारकर मैं आपसे गुहार लगाने यहां पहुंचा हूं। शिकायत के बाद कलेक्टर ने अधिकारियों को निष्पक्ष कार्रवाई करने के निर्देश दिए। बता दें कि इससे पहले भी कलेक्ट्रेट में इंसाफ नहीं मिलने पर कुछ लोगों ने जहर खाकर जान देने की कोशिश की। इसका मतलब साफ है कि जिले में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है।
इसी जनसुनवाई में अगरिया समुदाय के लोगो ने कलेक्टर से गुहार लगाई कि 50 वर्षों से नानाखेड़ी क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 1 स्थित दीनदयाल नगर में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। विकास के बड़े बड़े दावे किए जा रहे हैं लेकिन हकीकत देखना है तो इस वार्ड में आकर अवलोकन करें कि पक्के मकान बनाकर निवास कर रहे लोगों को कितनी मुसीबतें झेलनी पड़ रही है। इस वार्ड में न तो बिजली, न सड़क और न ही स्वच्छ पानी नसीब हो रहा है। अगरिया समुदाय के लोगो ने जनप्रतिनिधियों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि वे सिर्फ चुनाव के समय यहां आते हैं लेकिन इसके बाद फिर कभी नजर नहीं आते हैं। हकीकत यह है कि उनके समुदाय के लोगो को न तो पीएम आवास योजना के तहत मकान मिला है और न ही रहने के लिए पट्टे जारी किए गए हैं। दरअसल में यह समुदाय पारंपरिक रूप से लौहपीटा का कार्य कर अपना जीवन यापन करता है। और इस काम के सिलसिले में उन्हें प्रदेश के अन्य हिस्सों में जाना पड़ता है। उनकी अनुपस्थिति में सूने घरों में अक्सर चोरियां भी हो जाती हैं, जिससे उनकी जमा पूंजी पर डाका पड़ जाता है।
सरकारी राशन में गड़बड़झाला
यह सुनकर कोई भी चौंक जाएगा कि मध्यप्रदेश की 70 फीसदी आबादी सरकारी राशन ले रही है। सबसे हैरानी की बात यह है कि पिछले दो साल में मुफ्त राशन लेने वालों की संख्या 10 लाख बढ़ गई है।इससे दो बातें तो स्पष्ट हो जाती हैं। पहली बात इसमें गड़बड़झाला बहुत जबरदस्त है। दूसरी बात यह है कि अगर यह आंकड़ा सही है तो प्रदेश की 70 फीसदी आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रही है जोकि सरासर झूठ है। इस मामले में मध्यप्रदेश देश के शीर्ष राज्यों में पांचवें स्थान पर है। प्रदेश के 5 करोड़ 36 लाख 23 हजार 491 लोगों को सरकारी राशन वितरण किया जा रहा है। पीडीएस योजना केंद्र सरकार की है लेकिन इसके क्रियान्वयन में घोर लापरवाही हो रही है। केंद्र सरकार को इस मामले में पूरे देश में जांच के आदेश देना चाहिए क्योंकि योजना का लाभ हितग्राहियों को न जाकर उन्हें मिल रहा है जो इसके असली हकदार नहीं हैं।
सूत्र बताते हैं कि दस से बीस बीघा जमीन के जोतदारों को पीडीएस योजना का लाभ मिल रहा है जबकि इसके असली हकदार लाभ से वंचित हैं। सरकारी राशन दुकानों के संचालक मालामाल हो रहे हैं क्योंकि उनके रजिस्टर की जांच महज खानापूर्ति बनकर रह गई है। राज्य सरकारों को भी सूक्ष्मता से पूरे मामले की जांच के आदेश देने चाहिए क्योंकि इसमें बहुत धांधली हो रही है। सरकारी राशन दुकानों के संचालकों की रजिस्टर सिर्फ और सिर्फ दिखाबे की होती है। इनके कारनामे हाथी के दांत के समान हो गये हैं जो दिखाने के कुछ और खाने के कुछ और होते हैं। हालांकि वर्ष 2025 में प्रदेश भर में चलाए गए अभियान में राशन लेने वाले उपभोक्ताओं का वैरिफिकेशन किया गया , जिसके बाद 17.95 लाख लाभार्थियों की संख्या में कमी आई है। सबसे अहम मसला यह है कि पिछले एक साल में 18 लाख में सरकारी राशन लेने वालों की संख्या घटी लेकिन पिछले दो साल में इनकी आबादी 10 लाख कैसे बढ़ी, यह जांच का विषय होना चाहिए।
